Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 May, 2026 12:12 PM

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसके बाद बैंक के शेयर में बुधवार को करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक की एक आंतरिक जांच में करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़ी अनियमितता...
बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसके बाद बैंक के शेयर में बुधवार को करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक की एक आंतरिक जांच में करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़ी अनियमितता सामने आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) को किए गए ब्याज भुगतान की जांच कराई। यह जांच बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (ACB) ने करवाई, जिसकी अगुवाई एमडी रंगनाथ कर रहे हैं। यह भुगतान पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के 18 मार्च को इस्तीफा देने से कुछ दिन पहले किया गया था।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह मामला साल 2021 में शुरू हुआ बताया जा रहा है,जब MSRDC ने बैंक में बड़ी राशि जमा करने को लेकर बातचीत शुरू की थी। MSRDC ने अपनी जमा राशि पर 6.01 फीसदी ब्याज की मांग की थी, जबकि उस समय बैंक सामान्य बचत खातों पर करीब 3.5 फीसदी ब्याज दे रहा था।
रिपोर्ट में बताया गया कि MSRDC ने करीब 25,000 करोड़ रुपए जमा करने की बात कही थी। इस बड़े डिपॉजिट के लिए बैंक ने विशेष व्यवस्था बनाई, लेकिन RBI के नियमों के चलते सीधे तौर पर इतनी ऊंची ब्याज दर देना संभव नहीं था। इसके बाद कथित तौर पर ब्याज के अंतर को दूसरे तरीके से एडजस्ट करने की योजना बनी।
मार्केटिंग खर्च के जरिए किया गया भुगतान
इंटरनल जांच में सामने आया कि 2023-24 और 2024-25 के दौरान करीब 39.7 करोड़ रुपए को रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन के नाम पर खर्च दिखाया गया। यह भुगतान कुछ लोकल वेंडर्स के जरिए किया गया। जांच में कई अनियमितताएं भी पाई गईं, जैसे एक ही फोटो का अलग-अलग इनवॉइस में इस्तेमाल होना और कई कैंपेन के लिए वास्तविक इवेंट रिकॉर्ड का अभाव। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैंक के मार्केटिंग विभाग ने माना कि यह भुगतान असल में बिजनेस डील का हिस्सा था। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से दावा किया गया कि इस व्यवस्था को “छुपाने” जैसा काम किया गया।
बैंक अधिकारियों पर सवाल
RBI के नियमों के अनुसार किसी एक ग्राहक को विशेष ब्याज या लाभ देने के लिए अलग व्यवस्था नहीं की जा सकती। इंटरनल विजिलेंस रिपोर्ट में बैंक की एंटी-ब्राइबरी और गवर्नेंस पॉलिसी के उल्लंघन की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट में बैंक के एमडी और सीईओ Shashidhar Jagdishan, सीएफओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि यह पूरी व्यवस्था सामान्य बैंकिंग निगरानी से बाहर थी, जिससे रेगुलेटरी और रेपुटेशन रिस्क पैदा हुआ।
फिलहाल इस मामले पर बैंक या RBI की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर बड़ी बहस खड़ी कर रहा है।