Edited By Sanjeev,Updated: 30 Sep, 2026 02:29 PM

दिल्ली पुलिस ने नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया से चल रहे एक कथित नकली Apple/iOS टेक्निकल-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है और धोखाधड़ी वाली कॉल और गिफ्ट-कार्ड स्कैम के जरिए US नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया है।...
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया से चल रहे एक कथित नकली Apple/iOS टेक्निकल-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है और धोखाधड़ी वाली कॉल और गिफ्ट-कार्ड स्कैम के जरिए US नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। सब-इंस्पेक्टर गजेंद्र माथुर को 25 सितंबर को मिली खास जानकारी के आधार पर वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS) की एक टीम ने नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-II के B-68/1B, तीसरी मंजिल पर "वेप्ट्रा" (Veptra) नाम से चल रहे एक संदिग्ध इंटरनेशनल टेक-सपोर्ट फ्रॉड कॉल सेंटर पर छापा मारा।
इस ऑपरेशन की अगुवाई AATS/वेस्ट के इंचार्ज इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने की जो ACP/ऑपरेशन्स राजेश कुमार की देखरेख और DCP/वेस्ट डिस्ट्रिक्ट हरेश्वर वी. स्वामी की कुल निगरानी में किया गया। छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर के कथित मालिक अरुण, उसके पार्टनर सलीम और पांच कॉलर्स को पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि कॉलर्स US में लोगों से बात करने के लिए लैपटॉप और हेडफोन का इस्तेमाल करते थे और नकली अंग्रेजी नाम बताते थे।
ऑपरेशन के बाद 26 सितंबर को नारायणा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 319(2), 61(2) और 3(5) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66D के तहत FIR नंबर 279/2026 दर्ज की गई। शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपी US में लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नकली Apple/iOS टेक्निकल-सपोर्ट सेटअप चलाते थे। वे कथित तौर पर टोल-फ्री नंबरों के जरिए US के निवासियों से संपर्क करते थे और खुद को Apple टेक्निकल-सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बताते थे। कॉलर्स पीड़ितों को बताते थे कि उनके डिवाइस या सिस्टम में वायरस, मैलवेयर या पोर्नोग्राफिक कंटेंट का पता चला है और वे यह दावा करके जल्दबाजी का माहौल बनाते थे कि तुरंत टेक्निकल मदद की जरूरत है।
पीड़ितों को कथित टेक्निकल समस्याओं को ठीक करने के बहाने गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए मनाया जाता था। इसके बाद कॉलर कथित तौर पर गिफ्ट-कार्ड की जानकारी या कोड हासिल करते थे और उन्हें इस काम में शामिल दूसरे लोगों को भेज देते थे। जब्त किए गए लैपटॉप की शुरुआती जांच में पुलिस को Eyebeam, UltraViewer और AnyDesk जैसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल मिले। साथ ही, US के नंबरों वाली कॉल हिस्ट्री भी मिली।
पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान पांच लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, दो राउटर, छह हेडफोन, 10 क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पांच चेक बुक और एक Audi A3 35 TDI कार जब्त की गई। आरोपियों की पहचान अरुण (29) और सलीम (28) के तौर पर हुई, जो दोनों काकरोला के रहने वाले हैं; इनके साथ काकरोला के ही निखिल (30), पीतमपुरा के मोंटू सिंह (34), किशनगढ़ के तिरहुचू (26), उत्तम नगर के करण (28) और सागरपुर के विशाल (29) भी शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि बड़े नेटवर्क का पता लगाने, टोल-फ्री नंबरों के सोर्स का पता करने, संपर्क किए गए लोगों की पुष्टि करने, गिफ्ट-कार्ड ट्रांजैक्शन की जांच करने, जब्त किए गए डिजिटल सबूतों का विश्लेषण करने और मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का रास्ता) का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। अधिकारी हर आरोपी की अलग-अलग भूमिका की भी जांच कर रहे हैं और इस काम में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश में हैं।