Edited By Sahil Kumar,Updated: 04 May, 2026 03:34 PM

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जहाँ एक ओर पारा चढ़ा हुआ है, वहीं एक ऐसा रुझान है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता—वह है भारतीय जनता पार्टी के लिए डिजिटल शक्ति का मजबूत होता प्रभाव। जबकि जमीनी अभियान अपनी जगह जारी हैं, सूत्रों का कहना है कि डिजिटल...
नेशनल डेस्कः पश्चिम बंगाल की राजनीति में जहाँ एक ओर पारा चढ़ा हुआ है, वहीं एक ऐसा रुझान है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता—वह है भारतीय जनता पार्टी के लिए डिजिटल शक्ति का मजबूत होता प्रभाव। जबकि जमीनी अभियान अपनी जगह जारी हैं, सूत्रों का कहना है कि डिजिटल क्षेत्र एक ऐसे नए रणक्षेत्र के रूप में उभरा है जहाँ वास्तव में जंग जीती जा सकती है—और यह सब नीरव साठे के डिजिटल अभियान के कारण संभव हो रहा है।
खबरों के अनुसार, डिजिटल दुनिया नीरव साठे के सोशल मीडिया ब्रह्मांड के विकास का एक मंच बन गई है, जो एक ऐसी 'मौन डिजिटल लहर' (silent digital wave) पैदा कर रही है जिसकी ओर कई लोग इशारा कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह रणनीति मुख्य रूप से एक विशेष सोशल मीडिया इकोसिस्टम बनाने और विकसित करने पर केंद्रित है, जहाँ सकारात्मकता सुनिश्चित करने पर सबसे अधिक जोर दिया गया है।
यह दृष्टिकोण अन्य दलों द्वारा अपनाए गए तरीकों से काफी अलग है। जहाँ अन्य दल केवल वायरल मीम्स और संबंधित सामग्री के माध्यम से युवा मतदाताओं का ध्यान खींचने (attention economy) की कोशिश कर रहे हैं, वहीं रिपोर्टों से पता चलता है कि यहाँ जनता के बीच एक खास नैरेटिव विकसित करने के लिए सैकड़ों मीम पेजों का बेहद व्यवस्थित उपयोग किया गया है।
इस अभियान की सबसे अनूठी बात इन्फ्लुएंसरों (influencers) को जोड़ने का 'बहु-स्तरीय दृष्टिकोण' (multi-tier approach) है। केवल बड़े राजनीतिक चेहरों का उपयोग करने के बजाय, विभिन्न क्षेत्रों के छोटे (micro) और मध्यम स्तर के इन्फ्लुएंसरों के साथ भी तालमेल बिठाया गया। इससे एक ऐसा प्रभाव पैदा हुआ जिससे राजनीतिक संदेश 'प्रोपेगेंडा' के बजाय लोगों की स्वाभाविक राय की तरह लगने लगे।
विश्लेषकों का मानना है कि इस अभियान की सफलता केवल प्रचार की तरकीबों पर निर्भर नहीं है, बल्कि इस बात पर टिकी है कि किस तरह विमर्श (narrative) को गढ़ा गया। इसमें लगातार सकारात्मक पक्ष को सामने रखने और किसी भी नकारात्मक संचार को काटने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
हालाँकि, अभी तक अभियान प्रबंधन टीम की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मार्केटिंग और राजनीतिक हलकों में इस पूरे प्रयास के भीतर नीरव साठे की भूमिका तेजी से उभरकर सामने आ रही है।