पारस महाराज का बड़ा ऐलान- 31 दिसंबर के बाद ज्योतिष छोड़ेंगे, सत्य-न्याय और व्यवस्था परिवर्तन के लिए बनाएंगे राजनीतिक दल

Edited By Updated: 31 Aug, 2026 01:12 PM

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देश के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत एवं ज्योतिषाचार्य पारस महाराज ने सनातन धर्म, राष्ट्र निर्माण और पंजाब की राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ही राष्ट्र धर्म है और...

नई दिल्ली : देश के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत एवं ज्योतिषाचार्य पारस महाराज ने सनातन धर्म, राष्ट्र निर्माण और पंजाब की राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ही राष्ट्र धर्म है और राष्ट्र का वास्तविक कल्याण सनातन मूल्यों की स्थापना में ही निहित है।

पारस जी महाराज ने कहा कि सनातन केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि सत्य, न्याय, कर्तव्य, सेवा, संस्कार और मानव कल्याण का मार्ग है। आज विश्व भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सनातन दर्शन की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि देश का युवा अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से तेजी से जुड़ रहा है, जो भारत के भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

31 दिसंबर के बाद बदल जाएगी जीवन की दिशा

पारस महाराज ने कहा कि 31 दिसंबर के बाद वह कुंडली बनाने और ज्योतिषीय कार्य को छोड़ने का निर्णय ले चुके हैं। इसके बाद उनका लक्ष्य धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना तथा राष्ट्र निर्माण के लिए व्यापक सामाजिक-राजनीतिक अभियान चलाना होगा। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से वह एक राजनीतिक दल के गठन की दिशा में आगे बढ़ेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य स्वयं सत्ता हासिल करना या चुनाव लड़ना नहीं है।

पंजाब बनेगा परिवर्तन का केंद्र

पारस महाराज ने पंजाब को विशेष रूप से अपने अभियान का केंद्र बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पंजाब का इतिहास, संस्कृति, त्याग और राष्ट्र के प्रति योगदान अद्वितीय रहा है। ऐसे में पंजाब में ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें न्याय, पारदर्शिता, राष्ट्रहित, युवा शक्ति और सनातन मूल्यों को प्रमुख स्थान मिले। उन्होंने कहा कि पंजाब की व्यवस्था में बदलाव केवल राजनीतिक परिवर्तन का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण और नई पीढ़ी को सही दिशा देने का भी विषय है।

“सनातन किसी के खिलाफ नहीं, सबके कल्याण के लिए है”

पारस महाराज ने कहा कि सनातन की मूल भावना किसी व्यक्ति, समुदाय या विचार के विरोध की नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की है। भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत से है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी संस्कृति को समझें, अपने इतिहास से जुड़ें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

महाराज ने कहा कि आने वाले समय में उनका अभियान धर्म, सत्य, न्याय, राष्ट्रहित और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दों को केंद्र में रखेगा। उन्होंने दोहराया कि प्रस्तावित राजनीतिक दल का लक्ष्य केवल चुनावी राजनीति करना नहीं बल्कि जन-जागरण के माध्यम से व्यवस्था में सकारात्मक और मूलभूत परिवर्तन लाना होगा।

बेटे की स्मृति में ‘हर्षी वेलफेयर सोसाइटी’ का निर्माण

पारस महाराज ने अपने पुत्र की स्मृति में ‘हर्षी वेलफेयर सोसाइटी’ का निर्माण किया है और इसकी जिम्मेदारी अपनी बेटी खुशी को सौंपी है। उन्होंने कहा कि इस संस्था में प्राप्त होने वाला प्रत्येक दान लोक कल्याण और जन कल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि समाज से मिलने वाला सहयोग समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा और सहायता में ही समर्पित हो। उन्होंने कहा, “हर्षी वेलफेयर सोसाइटी मेरे पुत्र की स्मृति को सेवा के माध्यम से जीवित रखने का संकल्प है।”

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