Edited By Niyati Bhandari,Updated: 24 May, 2026 01:51 PM

Kinnar Marriage Tradition: जानिए, किन्नर समुदाय की सबसे रहस्यमयी परंपरा के बारे में, जहां वे तमिलनाडु के कूवगम में अरावन देवता से केवल एक रात के लिए विवाह करते हैं। महाभारत काल से जुड़ी अर्जुन पुत्र अरावन और भगवान श्रीकृष्ण के मोहिनी रूप की इस...
Kinnar Marriage Tradition: किन्नरों को हिन्दू समाज में हमेशा विशेष स्थान मिला है। प्राचीन ग्रंथों और परंपराओं में किन्नरों का उल्लेख केवल सामाजिक रूप में ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और दिव्य शक्तियों से जुड़े रूप में भी मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किन्नरों को भगवान का विशेष स्वरूप माना जाता है।

कई जगह इन्हें देवताओं के दूत या आशीर्वाद देने वाले रूप में भी देखा जाता है। किन्नरों में अर्धनारीश्वर का स्वरूप भी माना जाता है। वहीं, किन्नर समुदाय से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं समय के साथ लोगों के बीच जिज्ञासा का विषय बनी रही हैं। इन्हीं में से एक है एक रात की शादी की परंपरा, जिसके बारे में अक्सर सवाल उठते हैं कि आखिर इसके पीछे क्या वजह है। यह परंपरा केवल सामाजिक नहीं, बल्कि इससे संबंधित एक पौराणिक कथा भी है।
किन्नर एक रात के लिए शादी करते हैं, यह बात पूरी तरह से हर जगह लागू नहीं होती बल्कि यह परंपरा कुछ खास क्षेत्रों और कुछ किन्नरों से जुड़ी एक विशेष मान्यता है। दरअसल, किन्नरों की शादी की यह परंपरा तमिलनाडु के एक गांव में बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती है। किन्नरों के विवाह की यह कथा भगवान श्रीकृष्ण और अरावन देवता से जुड़ी हुई है। किन्नरों के देवता अरावन माने जाते हैं, जो महाभारत के महान योद्धा अर्जुन और नाग कन्या उलूपी के पुत्र थे।

महाभारत काल की एक कथा के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले पांडवों ने मां काली को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा की थी। इस पूजा में एक राजकुमार की बलि आवश्यक थी। जब कोई भी उस बलि के लिए तैयार नहीं हुआ था, तब अरावन ने स्वयं आगे आकर बलिदान देने की इच्छा जताई।
हालांकि, उन्होंने एक शर्त रखी कि वह बिना विवाह किए अपनी बलि नहीं देंगे। अब सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कौन उनसे विवाह करेगा, क्योंकि अगले ही दिन उस कन्या को विधवा होना पड़ता। तब भगवान कृष्ण ने इस स्थिति का समाधान निकाला। उन्होंने मोहिनी रूप धारण किया और अरावन से विवाह किया। अगले दिन अरावन ने बलिदान दिया और भगवान कृष्ण ने विधवा के रूप में शोक भी जताया।
इसी कथा के आधार पर कुछ किन्नर समुदाय हर साल एक प्रतीकात्मक विवाह करते हैं, जिसे खासकर कूवगम त्योहार में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में किन्नर अरावन से विवाह करते हैं और अगले दिन विधवा की तरह शोक मनाते हैं।
