Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Jun, 2026 09:23 AM

सनातन धर्म में एकदाशी व्रत को बाकी सभी व्रतों से सबसे उत्तम और मोक्षदायी माना गया है। यह तिथि पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ माह का महीना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है क्योंकि इस माह में योगिनी एकादशी और देवशयनी...
Ashadha month Ekadashi list : सनातन धर्म में एकदाशी व्रत को बाकी सभी व्रतों से सबसे उत्तम और मोक्षदायी माना गया है। यह तिथि पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ माह का महीना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है क्योंकि इस माह में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की शुरुआत 30 जून से होगी। वहीं, इस माह का समापन 29 जुलाई को होगा। माना जाता है कि देवशयनी एकदाशी के दिन भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, देवशयनी एकादशी से ही चतुर्मास की शुरुआत होती है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में चले जाने से सभी मांगलिक कार्यों में रोक लग जाती है। लेकिन इस दो एकादशी तिथि के दिन पूरे विधि-विधान के साथ विष्णु जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में आने वाली सारी परेशानी दूर हो जाती है और मन की हर मुराद पूरी होती है। तो आइए जानते हैं आषाढ़ माह की दो एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण समय के बारे में-
योगिनी एकादशी डेट और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर होगी और इसका समापन 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। उदया तिथि अनुसार योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी का पारण
योगिनी एकादशी का 11 जुलाई को किया जाएगा। 11 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट पर साधक पूरे विधि-विधान से अपने माता लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा करके अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
देवशयनी एकादशी डेट और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। देवशयनी एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 25 जुलाई को दोपहर 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
देवशयनी एकादशी पारण समय
देवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई के दिन किया जाएगा। 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट के मध्य साधक स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा करें।
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