Baisakhi 2022: गेहूं की बाली लाएगी खुशहाली, घर में बरसेगा सोना

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 11 Apr, 2022 07:38 AM

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महार्षि भृगु जी द्वारा रचित ग्रंथ भृगु संहिता जो कि सुल्तानपुर लोधी में रखा हुआ है। इस ग्रंथ को पढ़ने वाले महायश वाचक श्री मुकेश पाठक जी द्वारा एक महाउपाय जिसे करने से अन्न एवं धन कि कभी भी कमी नहीं रहती। यह उपाय भी श्री भृगु संहिता में

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Baisakhi upay: महार्षि भृगु जी द्वारा रचित ग्रंथ भृगु संहिता जो कि सुल्तानपुर लोधी में रखा हुआ है। इस ग्रंथ को पढ़ने वाले महायश वाचक श्री मुकेश पाठक जी द्वारा एक महाउपाय जिसे करने से अन्न एवं धन कि कभी भी कमी नहीं रहती। यह उपाय भी श्री भृगु संहिता में ही लिखा हुआ है। यह उपाय सिर्फ और सिर्फ बैसाखी के दिन ही किया जा सकता है। 

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यह उपाय 14 अप्रैल 2022 को गुरुवार के दिन सुबह 8 बजे से 11 बजे के दौरान किया जाना चाहिए। बैसाखी पर नई फसल की सात गेहूं की बालियां लीजिए और अपने इष्टदेव को उन गेहूं की बालियों को वस्त्र, पीला मीठा प्रसाद एवं दक्षिणा सहित अर्पण करें और प्रार्थना करें कि - हे प्रभु ! इस नई फसल के भोग को स्वीकार करें और हमारी नई फसल की रक्षा करें। मुझ पर और मेरे परिवार में कभी भी अन्न, धन की कमी न रहें और प्रभु जो भी प्रदान करो उसका पूर्ण सुख भी प्रदान करो। 

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अगले दिन उन गेहूं की बालियों को वहां से उठाकर ऐसे स्थान पर रखें जहां पर आप रूपया-पैसा इत्यादि रखते हैं। अगली बार फिर बैसाखी पर ऐसे ही यह उपाय करना है और पिछले वर्ष रखी गयी गेहूं की बालियों में से दाने निकालकर पीस लें और घर के जिस भी बर्तन में आटे को रखा जाता है उसमें यह पीसा हुआ आटा मिला दें। ऐसा करने से प्रभु कृपा से उस घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं रहती। यह उपाय हर बैसाखी से बैसाखी करना चाहिए। अगर गेहूं की बालियां उपलब्ध न हो पाये तो नये अनाज का कुछ गेहूं लेकर भी यह उपाय किया जा सकता है। अगर किसी घर में रुपया-पैसा इत्यादि रखने का स्थान न हो तो वह गेहूं की बालियों को घर के पूजा स्थान में भी रख सकते हैं। 

बैसाखी से संबंधित कुछ अन्य जानकारी- इसी दिन सन् 1699 में सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने खालसा पंथ की नींव रखी थी। इस दिन गुरुद्वारों को गुरु जी के सम्मान में सजाया जाता है तथा विशेष तौर पर लंगर बनाया जाता है एवं उसका वितरण किया जाता है और सम्पूर्ण मानवता की सलामती के लिए प्रार्थनाएं भी की जाती है क्योंकि यह त्यौहार सभी समुदायों के लोगों के साथ शांति, प्रेम एवं सद्भावना के साथ रहने के लिये समर्पित है। आज ही के दिन स्वामी दयानंद जी ने भी आर्य समाज की स्थापना की थी और यही ही दिन खालसा पंथ के जन्म का भी प्रतीक है। 

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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