Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन इस विधि से करें मां चंद्रघंटा की पूजा और पढ़ें कथा

Edited By Updated: 20 Mar, 2026 02:19 PM

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Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। मान्यता है...

Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा होता है। देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है। इसी वजह से श्रद्धालु उन्हें चंद्रघंटा कहकर बुलाते हैं।

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मां चंद्रघंटा का स्वरुप कैसा है
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर एक घंटे के आकार का चंद्रमा स्थित है, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। यह नाम उनके दिव्य रूप को दर्शाता है, जिसमें एक अद्वितीय तेज और ममता समाहित है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत अलौकिक और भव्य माना जाता है। उनका रूप शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ उनकी शक्ति भी अद्वितीय है, जो हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि प्रदान करती है। मां चंद्रघंटा की पूजा से जीवन के सभी पहलुओं में सफलता प्राप्त होती है। विशेष रूप से, इस दिन सूर्योदय से पहले पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इस समय मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा में लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने का महत्व है, क्योंकि ये फूल मां की ममता और शक्ति का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्द्धचंद्र के आकार का घंटा स्थित है, जो उनकी महिमा और तेजस्विता को दर्शाता है। यही कारण है कि देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा।

मां का विशेष प्रसाद
मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। प्रसाद चढ़ाने के बाद इसे स्वयं भी ग्रहण करें और दूसरों में बांटें मां चंद्रघंटा की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है मां चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करें।

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मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
लाल वस्त्र धारण करके मां चंद्रघंटा की उपासना करना उत्तम होता है। मां को लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी समर्पित करनी चाहिए। नवरात्रि के तीसरे दिन मणिपुर चक्र पर 'रं' अक्षर का जाप करने से मणिपुर चक्र मजबूत होता है अगर इस दिन की पूजा से कुछ अद्भुत सिद्धियों जैसी अनुभूति होती है तो उस पर ध्यान न देकर आगे साधना करते रहना चाहिए।

मंगल दोष से मुक्ति
कुंडली में मंगल कमजोर है या मंगल दोष है तो देवी की उपासना बेहद कारगर है लाल रंग के वस्त्र धारण करके मां की आराधना करें। मां को लाल फूल, ताम्बे का सिक्का या ताम्बे की कोई वस्तु चढ़ाएं। मां को हलवा या मेवे का भोग भी लगाएं। मां के किसी भी मंत्र का जाप करें। फिर मंगल के मूल मंत्र का जाप करें। मंगल का मंत्र होगा- ॐ अं अंगारकाय नमः. मां को अर्पित किए गए ताम्बे के सिक्के को अपने पास रख लें

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मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

मां चंद्रघंटा की महिमा
मां चंद्रघंटा के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा गया है। माता चंद्रघंटा के दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में अस्त्र शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध की है। इनकी पूजा करने वाला व्यक्ति पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। ज्योतिष में इनका संबंध मंगल ग्रह से होता है। इनकी आराधना से स्वभाव में भी विनम्रता आती है।

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नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
नवरात्रि का तीसरा दिन साहस और आत्मविश्वास पाने का है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना करने पर हर तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चन्द्रघण्टा की पूजा-अर्चना उन लोगों को विशेष रूप से करनी चाहिए, जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर है। नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष साधना से व्यक्ति निर्भय हो जाता है।

आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी 
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य 
9005804317

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