Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Mar, 2026 11:32 AM

Chaitra Navratri 2026 Day 9: चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इनके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। मां सिद्धिदात्री देवी सरस्वती की ही स्वरूप हैं। वैसे तो इनका वाहन...
Chaitra Navratri 2026 Day 9: चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इनके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। मां सिद्धिदात्री देवी सरस्वती की ही स्वरूप हैं। वैसे तो इनका वाहन सिंह है लेकिन यह माता लक्ष्मी की तरह कमल के आसन पर विराजमान होती हैं। माता के चार हाथ हैं और इनके दाहिने और नीचे वाले हाथ में चक्र ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं ओर नीचे के हाथ में कमल का फूल और ऊपर वाले हाथ में शंख हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां भगवती के इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति को अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है। साथ ही भय और रोगों से मुक्ति मिलती है।
सिद्धिदात्री की महिमा
नवदुर्गा का नौवां और अंतिम स्वरूप है मां सिद्धिदात्री। जो समस्त वरदानों और सिद्धियों को देने वाली देवी मां सिद्धिदात्री हैं। यह कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और इनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म है। यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग, देवी-देवता और मनुष्य सभी इनकी कृपा से सिद्धियों को प्राप्त करते हैं। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से नवरात्रि के 9 दिनों की उपासना का फल मिलता है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
नवमी के दिन शरीर और मन से शुद्ध रहते हुए मां के सामने बैठें। उनके सामने दीपक जलाएं और उन्हें नौ कमल के फूल अर्पित करें। मां सिद्धिदात्री को नौ तरह के खाद्य पदार्थ भी अर्पित करें। मां के मंत्र "ॐ ह्रीं दुर्गाय नमः" का यथाशक्ति जाप करें। अर्पित किए हुए कमल के फूल को लाल वस्त्र में लपेटकर रखें। देवी को अर्पित किए हुए खाद्य पदार्थों को पहले निर्धनों में बांटें, फिर स्वयं भी ग्रहण करें।

भय मुक्त करेंगी मां सिद्धिदात्री
नवमी के दिन एक पान के पत्ते पर 9 साबुत फूलदार लौंग के साथ देसी कपूर रखें। 9 लाल गुलाब के फूलों के साथ देवी को अर्पण करके अपने अज्ञात भय को खत्म करने की प्रार्थना करें। इसके बाद 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे मंत्र' का 108 बार लाल आसन पर बैठकर जाप करें।
नवमी पर हवन का विशेष महत्व
नवमी के दिन हवन का विधान है। इस दिन नवरात्रि की पूर्णता के लिए हवन भी किया जाता है। इस दिन पहले पूजा करें और फिर हवन करें। हवन सामग्री में जौ और काला तिल मिलाएं। इसके बाद कन्या पूजन करें। कन्या पूजन के बाद सम्पूर्ण भोजन का दान करें।
माता सिद्धिदात्री के पास हैं 8 सिद्धियां
भक्त नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास और पूजा-अर्चना करके मां दुर्गा की कृपा पाते हैं और मनचाहा फल प्राप्त करते हैं। साथ ही, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवता, गंधर्व, ऋषि और असुर भी माता सिद्धिदात्री की पूजा करके 8 सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं।

नवरात्रि के 9वें दिन का भोग
मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह के भोग लगाते हैं। हलवा, पूरी, चना, फल, खीर और नारियल जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि जामुनी या बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से विशेष फल मिलता है। भोग लगाने के बाद मां सिद्धिदात्री माता की विशेष रूप से आरती की जाती है।
हवन में इन चीजों का करें प्रयोग
आर्थिक लाभ के लिए- मखाने और खीर से हवन करें।
कर्ज मुक्ति के लिए- राई से हवन करें।
संतान संबंधी समस्याओं के लिए- माखन मिश्री से हवन करें।
ग्रह शान्ति के लिए- काले तिल से हवन करें।
सर्वकल्याण के लिए- काले तिल और जौं से हवन करें।
आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य
9005804317
