Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Mar, 2026 12:50 PM

Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana: 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्रि 2026। जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, सही पूजा विधि, धार्मिक महत्व और नवरात्रि के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए। मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए पढ़ें पूरी जानकारी।
Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक वासंती नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इसे चैत्र नवरात्रि भी कहते हैं। इस बार ये पर्व 19 से 27 मार्च तक मनाया जाएगा। विद्वानों का मानना है कि नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा धरती पर आती हैं और अंतिम दिन पुन: लौट जाती हैं।
इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार के दिन से हो रही है. शक्ति की उपासना के यह दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और यह पर्व लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए समर्पित रहता है इस साल का चैत्र नवरात्र कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद एक अनोखा संयोग बन रहा है दरअसल, इस दिन चैत्र नवरात्र के घटस्थापना वाले दिन पर अमावस्या आ रहाी है।
घटस्थापना कैसे करें?
इस साल चैत्र नवरात्रि खरमास के बीच में पड़ रही है, इसलिए शुभ मुहूर्त का महत्व और भी बढ़ जाता है। अभिजीत मुहूर्त के दौरान कलश स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि आप खरमास से जुड़े किसी भी नकारात्मक प्रभाव को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं तो मुख्य पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश की प्रार्थना करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा माना जाता है कि इन अनुष्ठानों का पालन करने से पूजा और भी अधिक शुभ और फलदायी हो जाती है।
ये काम भूलकर भी न करें
भले ही नवरात्रि चल रही हो लेकिन खरमास के दौरान कोई नया व्यापार शुरू करने या कोई बड़ी संपत्ति खरीदने से बचना चाहिए। इस समय सगाई या शादी की तारीखें तय न करने की सलाह दी जाती है। ऐसे मामलों को खरमास खत्म होने तक टालें। इस दौरान प्याज, लहसुन और मांस का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। किसी भी हाल में, भले ही अनजाने में हो, इस समय किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से देवी दुर्गा अप्रसन्न हो सकती हैं।

चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि
सुबह स्नान करके पूजा स्थान को साफ करें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखें। देवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजा करें। दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत भी रखते हैं।
चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु का उत्सव भी माना जाता है। यह प्रकृति में नए जीवन और ऊर्जा के आगमन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों में देवी दुर्गा की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसी कारण कई लोग नवरात्रि के शुभ अवसर पर नए कार्य, व्यापार या घर की शुरुआत भी करते हैं, क्योंकि इसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है।
आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य
संपर्क सूत्र 9005804317
