Dhanteras Diya Rules :  धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा क्यों है खास? जानें घर के किन कोनों में दीये रखना माना जाता है शुभ

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 02:27 PM

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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार अत्यंत धूमधाम और खुशियों के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।

Dhanteras 13 Diya Rules : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार अत्यंत धूमधाम और खुशियों के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस की शाम को पूरे घर को दीपों की रोशनी से सजाने  की परंपरा है। शास्त्रों में इस दिन 13  दीपक जलाने का विशेष विधान बताया गया है। माना जाता है कि 13 दीयों का यह नियम परिवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास स्थापित करता है। तो आइए जानते हैं कि धनतेरस पर 13  दीपक जलाने का क्या धार्मिक महत्व है और इन्हें घर के किन-किन स्थानों पर स्थापित करना चाहिए। 

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में 13 संख्या का संबंध 13 मुख्य दीपों और उनसे जुड़े संकल्पों से है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, धनतेरस की शाम को जलाए जाने वाले ये 13 दीये न केवल नकारात्मक ऊर्जा और अंधेरे को समाप्त करते हैं, बल्कि यमदेव को भी शांत करते हैं। मान्यता है कि मुख्य यम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों पर मंडरा रहा अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

घर के किन 13 कोनों और स्थानों पर जलाएं दीया?

पहला दीपक : यह सबसे मुख्य दीपक होता है। इसे सरसों के तेल से भरकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखा जाता है। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है ताकि अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो।

दूसरा दीपक : घर के मंदिर या पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के सामने चौमुखी दीया जलाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

तीसरा दीपक : मां लक्ष्मी के प्रतीक स्वरूप तुलसी के पौधे के पास तीसरा दीपक रखें।

चौथा दीपक : सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत के लिए मुख्य द्वार के ठीक सामने चौथा दीया स्थापित करें।

पांचवां दीपक : पांचवां दीया घर की छत पर खुले स्थान में रखें ताकि आकाश दीप के रूप में घर पर ईश्वरीय कृपा बनी रहे।

छठा दीपक : यदि पास में पीपल का पेड़ हो, तो वहां छठा दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे त्रिदेव और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

सातवां दीपक : सातवां दीया आसपास स्थित किसी भी नजदीकी मंदिर में जाकर प्रज्वलित करें।

आठवां दीपक : नकारात्मकता को दूर रखने के लिए आठवां दीपक घर में कचरा रखने वाले स्थान के पास जलाएं।

नौवां दीपक : घर के शौचालय के मुख्य द्वार के बाहर नौवां दीया रखें ताकि वहां से उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो सके।

दसवां दीपक : घर की बालकनी या गैलरी में दसवां दीया रखें।

ग्यारहवां दीपक : ग्यारहवां दीया घर की किसी मुख्य खिड़की पर स्थापित करें।

बारहवां दीपक : घर के पिछले हिस्से या छत के किसी अंधेरे कोने में बारहवां दीपक प्रज्वलित करें।

तेरहवां दीपक : तेरहवां दीपक रसोई घर में पीने के पानी के पास रखें। यह स्थान मां अन्नपूर्णा और पितरों का माना जाता है, जिससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

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