Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Sep, 2026 04:00 PM

Durva Ashtami 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाए जाने वाले दुराष्टमी व्रत की सही पूजा विधि, सिंदूरी वस्त्र, 11 दूर्वा का महत्व, धन प्राप्ति के उपाय और ग्रह-दोष निवारण के उपाय जानें
Durva Ashtami 2026: दूर्वा अष्टमी का पवित्र पर्व पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। सामान्यतः धर्म-कर्म के कार्यों में दूर्वा (दूब घास) का व्यापक उपयोग किया जाता है, लेकिन भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना इसके बिना अधूरी मानी जाती है। पूरे तन और मन से यह व्रत रखने पर साधक को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन श्री गणेश के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। भारत के पूर्वी भागों तथा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में यह त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जहां इसे 'दुराष्टमी व्रत' के नाम से जाना जाता है।
ध्यान रखें- दूर्वा अष्टमी के दिन घास न काटने जैसा काम निषेध है लेकिन पूजा के लिए दुर्वा घास तोड़ना शुभ माना गया है।

Durva Ashtami puja vidhi दूर्वा अष्टमी पूजा विधि
सबसे पहले अपने घर के मंदिर में दही, फूल, अगरबत्ती और पूजा सामग्री को इकट्ठा करें। अब इस सारी सामग्री को दूर्वा यानी पवित्र घास अर्पित करें। फिर इसी दूर्वा को श्री गणेश, भगवान शिव और मां पार्वती को चढ़ाएं।
दूर्वा अष्टमी के दिन श्री गणेश को तिल और मीठे आटे से बनी रोटी का भोग लगाना शुभ होता है। इसके अलावा ब्राह्मणों को दान-पुण्य करने से भाग्य भी उदय होता है।
दूर्वा अष्टमी के दिन हो सके तो सिंदूरी रंग के वस्त्र पहनें और श्री गणेश को 11 दूर्वा अर्पित करें।
दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि को बरकरार रखने के लिए शिव मंदिर में तिल और गेहूं का दान करें।

Durva Ashtami Remedies दूर्वा अष्टमी के दिन करें ये उपाय
ब्राह्मण को भोजन की थाली में 7 दूर्वा के कुछ कण दान स्वरुप अर्पण करने से भगवाण विष्णु व गणेश जी की कृपा प्राप्त होगी।
दूर्वा मलकर नहाने से ग्रहों का अशुभ प्रभाव शुभता में परिवर्तित हो जाता है।
दूर्वा की मुद्रिका बनाकर उत्तर दिशा में चन्द्रोदय के बाद अर्घ्य दें और महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए धन प्राप्ति की कामना करें।
