Edited By Sarita Thapa,Updated: 31 Jul, 2026 02:45 PM

एक दिन भगवान बुद्ध अपनी सभा में पहुंचे, तो उनके हाथ में एक रस्सी थी। भगवान बुद्ध ने आसन ग्रहण किया और बिना बोले वह रस्सी में गांठें लगाने लगे। वहां उपस्थित सभी लोग यह देख सोच रहे थे कि अब भगवान बुद्ध आगे क्या करेंगे?
Gautam Buddha Ki Katha : एक दिन भगवान बुद्ध अपनी सभा में पहुंचे, तो उनके हाथ में एक रस्सी थी। भगवान बुद्ध ने आसन ग्रहण किया और बिना बोले वह रस्सी में गांठें लगाने लगे। वहां उपस्थित सभी लोग यह देख सोच रहे थे कि अब भगवान बुद्ध आगे क्या करेंगे?
तभी भगवान बुद्ध ने सभी से एक प्रश्न किया, ‘‘मैंने इस रस्सी में तीन गांठें लगा दी हैं। अब मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि क्या यह वही रस्सी है, जो गांठें लगाने से पूर्व थी?’’
एक शिष्य ने उत्तर में कहा, ‘‘इसका उत्तर देना थोड़ा कठिन है, यह वास्तव में हमारे देखने के तरीके पर निर्भर है। एक तरह से देखें, तो रस्सी वही है, इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। दूसरी तरह से देखें, तो अब इसमें तीन गांठें लगी हुई हैं, जो पहले नहीं थीं। अतः इसे बदला हुआ कह सकते हैं।’’
भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘अब मैं इन गांठों को खोल देता हूं।’’

यह कहकर बुद्ध रस्सी के दोनों सिरों को एक-दूसरे से दूर खींचने लगे। उन्होंने पूछा, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, इस प्रकार इन्हें खींचने से क्या मैं इन गांठों को खोल सकता हूं?’’
एक शिष्य ने उत्तर दिया, ‘‘नहीं, ऐसा करने से तो गांठें और भी कस जाएंगी और इन्हें खोलना और मुश्किल हो जाएगा।’’
भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘बताओ इन गांठों को खोलने के लिए हमें क्या करना चाहिए?’’
एक शिष्य बोला, ‘‘इसके लिए हमें देखना होगा कि इसे कैसे लगाई गई थी।’’
भगवान बुद्ध बोल पड़े कि मैं यही तो सुनना चाहता था। मूल प्रश्न यही है कि जिस समस्या में तुम फंसे हो, वास्तव में उसका कारण क्या है?
बिना कारण जाने समाधान असंभव है। मैं देखता हूं कि अधिकतर लोग बिना कारण जाने ही समस्या का समाधान करना चाहते हैं, जोकि ठीक नहीं है। जरूरत है कि हम किसी भी समस्या के कारण को अच्छी तरह से जानें, उसका हल जरूर निकल जाएगा। यह कहकर महात्मा बुद्ध ने अपनी बात पूरी की।

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