क्यों प्रेमी जोड़ों का शादी से पहले जगन्नाथ मंदिर में एक साथ जाना माना जाता है अशुभ, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

Edited By Updated: 22 Jul, 2026 11:05 AM

jagannath temple rules for unmarried couples

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को सनातन धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर दुनिया भर में अपने चमत्कारों, अनसुलझे रहस्यों और अनोखी परंपराओं के लिए मशहूर है।

Jagannath Temple Rules for Unmarried Couples : ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को सनातन धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर दुनिया भर में अपने चमत्कारों, अनसुलझे रहस्यों और अनोखी परंपराओं के लिए मशहूर है। भगवान जगन्नाथ मंदिर से कई लोक कथाएं और मान्याएं जुड़ी हुई हैं, जो लोगों को हैरान कर देती है। इन्हीं में से एक बहुत दिलचस्प और प्रचलित मान्यता यह है कि कुंवारे प्रेमी जोडों को कभी भी एक साथ जगन्नाथ मंदिर के दर्शन नहीं करने चाहिए। जगत के पालनहार कहे जाने वाले भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर से जुड़ी मान्यता का पूरा सच क्या है। तो आइए जानते हैं भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर से इस अनोखी जुड़ी मान्यता के पीछे के पूरे सच के बारे में- 

Jagannath Temple Rules for Unmarried Couples

क्यों नहीं करना चाहिए अविवाहित जोड़ों को एक-साथ जगन्नाथ मंदिर के दर्शन ?
लोक मान्याताओं के अनुसार, शादी से पहले अगर कोई अविवाहिता जोड़ा एक-साथ जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करता है, तो उनके रिश्ते में खटास और दरार आनी शुरू हो जाती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि अगर दोनों एक साथ जगन्नाथ मंदिर की चौखट को एक साथ पार करते हैं, तो अंदर जाते ही दोनों के विचार बदलने लगते हैं, जिस कारण आगे जाकर दोनों का विवाह नहीं हो पाता। 

Jagannath Temple Rules for Unmarried Couples

राधा रानी से जुड़ी है कथा
इस पौराणिक लोक-मान्यता के पीछे द्वापर युग की एक बेहद भावुक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक बार राधा-रानी ने  भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप के दर्शन करने की इच्छा जताते हुए पुरी के पहुंची। लेकिन जैसे ही राधा रानी ने मंदिर के गर्भगृह की तरफ अपना कदम बढ़ाया, तो मंदिर में मौजूद एक पुजारी ने उन्हें मंदिर के अंदर आने से रोक दिया। पुजारी का कहना था कि चूंकि भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी का पारंपरिक विवाह नहीं हुआ है, इसलिए मंदिर के नियमों के अनुसार वे एक विवाहित जोड़े के रूप में भीतर प्रवेश नहीं कर सकतीं। यह सुनकर राधा रानी बहुत दुखी और क्रोधित हो गई। मान्यताओं के अनुसार, इसकी भावुकता और पीड़ा के क्षण में राधा रानी ने यह श्राप दिया कि जो भी अविवाहित जोड़ें इस मंदिर में एक साथ दर्शन करेंगे। उनके रिश्ते में बहुत सी मुश्किलें आएंगी और उनका प्रेम विवाह तक नहीं पहुंचेगा। यही एक वजह है कि   कई लोग आज भी इस परंपरा का पालन करते हुए अलग-अलग ही दर्शन करते हैं। 

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