Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Jul, 2026 12:55 PM

एक बार की बात है कि संत कबीर दास प्रवचन दे रहे थे। जब प्रवचन समाप्त हुआ तब सभी लोग वहां से जाने लगे, मगर एक व्यक्ति वहां पर बैठा रहा। कबीर समझ गए कि यह व्यक्ति किसी बात को लेकर परेशान है।
Sant Kabir Story : एक बार की बात है कि संत कबीर दास प्रवचन दे रहे थे। जब प्रवचन समाप्त हुआ तब सभी लोग वहां से जाने लगे, मगर एक व्यक्ति वहां पर बैठा रहा। कबीर समझ गए कि यह व्यक्ति किसी बात को लेकर परेशान है। कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘मैं गृहस्थ हूं। घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यहां गृह क्लेश क्यों होता है और वह कैसे दूर हो सकता है।’’
कबीर थोड़ी देर चुप रहे। फिर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, ‘‘दीपक जला कर लाओ।’’ कबीर की पत्नी दीपक जला कर ले आईं। वह आदमी हैरानी से देखता रहा। थोड़ी देर बाद कबीर बोले, ‘‘कुछ मीठा दे जाना।’’
इस बार उनकी पत्नी मीठे की बजाय नमकीन ले आईं। उस आदमी ने सोचा कि यह तो शायद पागलों का घर है। मीठा के बदले नमकीन, दिन में दीपक, यह सब क्या है?
वह बोला, ‘‘ठीक है, मैं चलता हूं।’’ कबीर ने पूछा, ‘‘आपको अपनी समस्या का समाधान मिल गया या अभी कुछ संशय बाकी है?’’ वह व्यक्ति बोला, ‘‘मेरी समझ में कुछ नहीं आया।’’
कबीर ने कहा, ‘‘मैंने दीपक मंगवाया तो मेरी घरवाली कह सकती थी कि तुम क्या सठिया गए हो?
इतनी दोपहर में दीपक की क्या जरूरत है?
लेकिन नहीं, उसने सोचा कि जरूर किसी काम के लिए मंगवाया होगा। इसके बाद मैंने मीठा मंगवाया तो वह नमकीन दे गई। मैं चुप रहा, यह सोचकर कि हो सकता है घर में कोई मीठी वस्तु न हो। यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। आपसी विश्वास बढ़ाने और तकरार में न फंसने से विषम परिस्थितियां अपने आप दूर हो जाती हैं।’’ इतनी देर में वह व्यक्ति समझ चुका था कि गृह क्लेश का रोना रोने से कुछ नहीं होता। यही गृहस्थी का मूल मंत्र है।