Hariyali Amavasya 2026 : हरियाली अमावस्या पर ग्रहण का दुर्लभ संयोग! पौधे लगाने से पहले पढ़ लें ये जरूरी नियम

Edited By Updated: 08 Aug, 2026 11:19 AM

hariyali amavasya 2026 rules

हिंदू धर्म में  सावन माह में आने वाली हरियाली अमावस्या का धार्मिक और पर्यावरण की दृष्टि से विशेष महत्व है। इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, 2026 को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मन की हर मुराद पूरी...

Hariyali Amavasya 2026 Rules : हिंदू धर्म में  सावन माह में आने वाली हरियाली अमावस्या का धार्मिक और पर्यावरण की दृष्टि से विशेष महत्व है। इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, 2026 को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मन की हर मुराद पूरी होती है। यह दिन पितरों के तपर्ण के लिए बहुत उत्तम माना जाता है। इस बार हरियाली अमावस्या एक खगोलीय घटना के कारण चर्चा का विषय बनी हुआ है। इस साल सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या सूर्य ग्रहण लगने के कारण इस दिन पूजा-पाठ और पौधारोपण कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन पौधा लगाने से पहले कौन से नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। 

Hariyali Amavasya 2026 Rules

सूर्य ग्रहण और सूतक काल की स्थिति
12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। धर्मशास्त्रों के नियम अनुसार, जो ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए भारत में पूजा-पाठ, शिव पूजा और  पौधरोपण के कार्यों पर ग्रहण का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं रहेगा। 

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पौधरोपण से जुड़े मुख्य नियम
हरियाली अमावस्या प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इस दिन पौधा लगाने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

सूर्य ग्रहण के दिन पौधा लगाते समय सही पौधे का चुनाव करना बहुत जरूरी है क्योंकि हर एक पौधे का अपना एक अलग महत्व होता है। पितृ दोष शांति के लिए पीपल या बरगद का पौधा लगाएं और सुख-समृद्धि के लिए आंवला नीम या बेलपत्र  लगाएं। इसके अलावा कष्टों के निवारण के लिए शमी या तुलसी का पौधा लगाना उत्तम माना जाता है।

पौधा लगाते समय दिशा का भी खास ध्यान रखा जाना चाहिए। पीपल और बरगद जैसे विशाल वृक्षों को घर के परिसर के भीतर न लगाएं, बल्कि इन्हें किसी सार्वजनिक स्थल, मंदिर परिसर या पार्क में ही रोपें। पौधे को हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रोपना शुभ माना जाता है।

अमावस्या के दिन सूर्यास्त से पहले-पहले ही पौधरोपण का कार्य पूरा कर लें। संध्याकाल के बाद पौधों या वृक्षों की पत्तियों को छूना या तोड़ना वर्जित माना गया है।

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