Edited By Prachi Sharma,Updated: 21 Mar, 2026 02:25 PM
Hindu Nav Varsh 2083 : आज नए संवत की बात करेंगे। नया संवत शुरू हो रहा है 19 मार्च को। सुबह 6:53 पर चैत्र मास की प्रतिपदा शुरू होगी और इसके साथ ही संवत शुरू हो जाएगा। अब नए संवत की शुरुआत में जो कुंडली बन रही है, वह कुंडली वैश्विक शांति के लिहाज से...
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Hindu Nav Varsh 2083 : आज नए संवत की बात करेंगे। नया संवत शुरू हो रहा है 19 मार्च को। सुबह 6:53 पर चैत्र मास की प्रतिपदा शुरू होगी और इसके साथ ही संवत शुरू हो जाएगा। अब नए संवत की शुरुआत में जो कुंडली बन रही है, वह कुंडली वैश्विक शांति के लिहाज से अच्छी नहीं बन रही। पूरे मिडिल ईस्ट में बवाल मचा हुआ है। ईरान के ऊपर लगातार हमले हो रहे हैं। ईरान काउंटर अटैक कर रहा है और यह स्थिति अभी आगे भी बनी रह सकती है और उसका जो सिग्नल मिल रहा है वह आपको मिल रहा है नव संवत की कुंडली से। जो कुंडली बन रही है वह कुंडली बहुत ज्यादा अच्छी नहीं बन रही। अच्छी बात यह है कि गुरु उस कुंडली में राशि के स्वामी हैं, लग्न के स्वामी हैं। उस कुंडली में क्योंकि मीन लग्न की पत्रिका बनी है। यह शांति का भाव होता है लेकिन दुश्मन की राशि में है, यह अच्छी स्थिति नहीं है। गुरुवार के दिन शुरुआत हो रही है संवत की। यानी कि साल के राजा गुरु हैं, यह एक तरीके से अच्छा हो गया।
रुद्र नाम का संवत है यह लेकिन स्थिति क्या बन रही है ?
मंगल, राहु और बुध इस कुंडली के 12वें भाव में है। यानी कि 11 नंबर राशि में कुंभ राशि में। अब 12वें भाव में यानी कि मंगल और राहु का आ जाना अच्छा नहीं है। मंगल राहु आक्रामक ग्रह है, अभी भी युति चल रही है और जहां पर वह बैठे हैं, वह एरी साइन है। यानी कि वायु तत्व की राशि है। दूसरा जहां पर वह बैठे हैं, वह युद्ध का भाव है। एक तरीके से 12वां भाव अच्छा भाव नहीं होता। अष्टम भाव के ऊपर देख रहे हैं। गुप्त राहु की जो दृष्टि है अष्टम के ऊपर है। वह गुप्त जो चीजें होती हैं सीक्रेट जिसको बोलते हैं या इंटेलिजेंस बोल देते हैं एजेंसीज बोल देते हैं उसका भाव है। तो वहां पर चीजें गड़बड़ है। मंगल राहु की युति होना ही गड़बड़ है। एक इधर यदि राशि में आते हैं तो सूर्य जब राशि चेंज होंगे
15 को तो वो मीन में आ जाएंगे। तो मीन में सूर्य है, शनि है, शुक्र है, चंद्रमा है। यह चार ग्रह हैं और राशि के स्वामी भी आपके राहु के प्रभाव में हैं। यानी कि लग्न के स्वामी तो कुंडली तो खैर अच्छी नहीं है और जब संवत की शुरुआत हो रही है तो गुरुवार के दिन हो रही है। जिस दिन सूर्य राशि बदलेंगे अगले महीने यानी कि अप्रैल को, 14 अप्रैल को उस दिन मंगलवार है। तो मंगल मंत्री हैं संवत के राजा गुरु हो गया मंत्री मंगल हो गया अब गुरु तो खैर अच्छे ग्रह है, शुभ ग्रह है मंगल मंत्री वो थोड़े से आक्रामक है। मंत्री का प्रभार एक ऐसे ग्रह के पास है जो लड़ाई का कारक है तो जंग रह सकती है यानी कि इस संवत में भी जंग रह सकती है। पिछले संवत की कुंडली में हमने विश्लेषण किया था कि ईरान के ऊपर संकट आएगा। ईरान के ऊपर दो बार संकट आया। आपने देखा कि जून में अटैक हुआ है ईरान के ऊपर। उसके परमाणु ठिकानों के ऊपर। अब दोबारा से फिर अटैक हो रहा है।
कुल मिलाकर यदि हम देखते हैं इस संवत की कुंडली को तो ज्यादा ग्रहों की दृष्टि कहां पर है ?
शनि की दृष्टि कन्या राशि के ऊपर, सूर्य की दृष्टि कन्या राशि के ऊपर, मंगल की आठवीं दृष्टि कन्या राशि के ऊपर। तो कन्या राशि सबसे ज्यादा पीड़ित हो गई। कन्या राशि बहुत सारे इस्लामिक देशों की राशि है। इसका मतलब यह है कि मिडिल ईस्ट में डिस्टरबेंस बरकरार रहनी चाहिए। यदि मिडिल ईस्ट में डिस्टरबेंस बरकरार है तो बाजार में भी डिस्टरबेंस रहेगी। तेल की कीमतों में भी डिस्टरबेंस रहेगी। यह पूरा साल हालांकि कुछ वक्त के लिए शांति आ सकती है। लेकिन यह संवत जो है इस संवत का विश्लेषण यही निकलता है कि डिस्टरबेंस रहेगी।
अब ज्यादा डिस्टरबेंस का टाइम कब आ सकता है ?
22 जून को जब ईरान के ऊपर अटैक हुआ था, उस समय मंगल केतु साथ आ गए थे। अब जब दोबारा अटैक हुआ है तो मंगल राहु साथ आए हैं। 23 फरवरी के बाद अटैक हुआ है तो इस साल नवंबर के महीने में 15 या 14 नवंबर की डेट है। मंगल केतु फिर साथ आ जाएंगे, यह अगेन क्राइसिस को बढ़ाएगा। अब दो विस्फोटक ताकतें जो लड़ाई की कारक शनिव राहु कुजवत केतु कहा जाता है। जब दोनों साथ आ जाएंगी तो दिक्कत और बढ़ सकती है और इसमें भी ज्यादा
दिक्कत क्या है ? गुरु केतु के नक्षत्र में आ जाएंगे। गुरु-केतु के साथ होंगे उस समय, यह फाइनशियली डिस्टर्ब करेगा। अभी तो बहुत ज्यादा डिस्टर्ब नहीं कर रहा।
जिन लोगों को 2008 याद है, जिन लोगों को 2020 या ज्यादा है उनको लगेगा यार ये तो निफ्टी 5 6% टूटा है। अभी बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं है और दुनिया के बाजार तो टूटे नहीं लेकिन जब वो स्थिति आएगी नवंबर वाली तो उस समय दुनिया के बाजार भी ज्यादा टूटेंगे क्योंकि ज्यादा देश इन्वॉल्व हो सकते हैं उसमें। अभी भी डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट नहीं है। ईरान अटैक कर रहा है, काउंटर अटैक नहीं हो रहे। सावधानी वाला ही है समय अच्छा बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है। सिर्फ एक उम्मीद की किरण नजर आती है कि गुरु राजा हैं संवत के तो हो सकता है कि कुछ न कुछ ब्लेसिंग वाली चीजें होती रहे।
आने वाले दिनों में जो बाजार में उतार-चढ़ाव आएंगे उसके लिए। यह संवत का विश्लेषण था इस साल जो शुरू हो रहा है।
नरेश कुमार
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