Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Jul, 2026 03:01 PM

ओडिशा के पुरी में एक दिन पहले शुरू हुए वार्षिक रथयात्रा उत्सव के तहत भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार अपराह्न अपने गंतव्य स्थान गुंडिचा मंदिर पहुंच गए।
पुरी (एजैंसी): ओडिशा के पुरी में एक दिन पहले शुरू हुए वार्षिक रथयात्रा उत्सव के तहत भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार अपराह्न अपने गंतव्य स्थान गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एस.जे.टी.ए.) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने कहा कि परंपरा के अनुसार भगवान की मूर्तियां रात भर अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगी और शनिवार शाम को उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा, जिसे उनका जन्मस्थान माना जाता है। वापसी रथयात्रा को ‘बहुदा’ यात्रा कहा जाता है जो 24 जुलाई को आयोजित की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को ‘पहंडी’ प्रक्रिया में देरी के कारण तीनों में से कोई भी रथ 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर नहीं पहुंच पाया।
परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद रथों को नहीं खींचा जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि रथों को बृहस्पतिवार शाम तक श्री गुंडिचा मंदिर पहुंचना था लेकिन रोशनी कम होने के कारण शाम करीब 7 बजे रथ खींचने का काम रोक दिया गया और शुक्रवार सुबह इसे फिर शुरू किया गया।
भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज’ रथ बृहस्पतिवार शाम 4 बजे के तय समय की बजाय शाम 5 बजकर 10 मिनट पर चलना शुरू हुआ था जिसे ग्रैंड रोड पर लगभग 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद मार्कीट चौक पर रोक दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ रथ लगभग 400 मीटर की दूरी तय करने के बाद मारिचिकोटे छक पर रुक गया जबकि भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ रथ को केवल कुछ गज ही खींचा गया और वह मुख्य मंदिर के सिंहद्वार के पास ही रुका रहा।
श्री भगवान की मूर्तियां बृहस्पतिवार रात अपने रथों में ही विराजमान रहीं और कड़ी सुरक्षा के बीच लाखों भक्त देवताओं की एक झलक पाने के लिए धक्का-मुक्की करते दिखे।