Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 Apr, 2026 09:54 AM

ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के बाहरी रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गिनती का कार्य शनिवार 11 अप्रैल, 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।
Jagannath Temple Puri News : ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के बाहरी रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गिनती का कार्य शनिवार 11 अप्रैल, 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। मंदिर प्रशासन ने अब आगामी सोमवार से मंदिर के भीतरी रत्न भंडार के रहस्यमयी खजाने को खोलने और उसकी गिनती शुरू करने की तैयारी कर ली है।
बाहरी भंडार की गिनती: 1978 से अधिक मिला खजाना
मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने बताया कि बाहरी रत्न भंडार की इन्वेंट्री प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस बार की गिनती में 1978 की आधिकारिक सूची की तुलना में अधिक आभूषण और रत्न पाए गए हैं। इन सभी को अब 'डिजिटल कैटलॉग' का हिस्सा बनाया जा रहा है, जिसमें 3D मैपिंग और वीडियोग्राफी का उपयोग किया गया है।
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सोमवार से खुलेगा भीतरी रत्न भंडार
बाहरी हिस्से का काम पूरा होने के बाद, अब सबकी नजरें भीतरी रत्न भंडार पर टिकी हैं, जिसे लेकर कई पौराणिक कथाएं और रहस्य जुड़े हुए हैं।
तारीख: सोमवार, 13 अप्रैल 2026।
प्रक्रिया: सरकारी Standard Operating Procedure (SOP) के अनुसार, एक उच्च स्तरीय टीम जिसमें रत्न विशेषज्ञ, स्वर्णकार और मंदिर के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं, भीतरी भंडार में प्रवेश करेंगे।
सुरक्षा और तकनीक: गिनती के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। खजाने की शुद्धता और वजन की सटीक जांच के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा।

गिनती का पूरा शेड्यूल
प्रशासन ने मंदिर की दैनिक रीतियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गिनती का समय तय किया है:
13 अप्रैल: भीतरी रत्न भंडार की गिनती शुरू होगी।
14 अप्रैल: 'महा विशुव संक्रांति' (ओडिया नव वर्ष) के कारण गिनती का कार्य स्थगित रहेगा।
16 से 18 अप्रैल: खजाने की गणना और सत्यापन का कार्य फिर से जारी रहेगा।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल इन्वेंट्री
इस बार मंदिर प्रशासन का लक्ष्य केवल गिनती करना ही नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ के इस विशाल खजाने का एक स्थायी और सुरक्षित रिकॉर्ड तैयार करना है। आभूषणों की 3D स्कैनिंग की जा रही है ताकि भविष्य के लिए एक विस्तृत 'ई-कैटलॉग' तैयार किया जा सके।
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