Jaya Kishori Relationship Advice : प्रेम में समर्पण या अधिकार ? जया किशोरी से सीखें प्रेम निभाने की सच्ची परिभाषा

Edited By Updated: 02 Jan, 2026 02:59 PM

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आज के दौर में जहां रिश्ते जितनी जल्दी बनते हैं, उतनी ही जल्दी टूट भी जाते हैं, वहां प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी जी के विचार किसी मार्गदर्शक की तरह काम करते हैं।

Jaya Kishori Relationship Advice : आज के दौर में जहां रिश्ते जितनी जल्दी बनते हैं, उतनी ही जल्दी टूट भी जाते हैं, वहां प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी जी के विचार किसी मार्गदर्शक की तरह काम करते हैं। अक्सर लोग प्रेम को अधिकार समझ बैठते हैं, लेकिन जया किशोरी जी के अनुसार, प्रेम का असली आधार कुछ और ही है। तो आइए  जानते हैं  प्रेम और समर्पण पर उनके अनमोल विचारों के बारे में-

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अधिकार नहीं, आदर है प्रेम
जया किशोरी जी कहती हैं कि प्रेम का मतलब किसी पर अपनी मर्जी थोपना या उसे नियंत्रित करना नहीं है। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, तो सबसे पहले उसके व्यक्तित्व का सम्मान करें। जहां अधिकार की भावना आती है, वहां अहंकार जन्म लेता है और जहां अहंकार होता है, वहां प्रेम टिक नहीं सकता।

समर्पण का अर्थ दासता नहीं
अक्सर लोग समर्पण को अपनी हार या गुलामी समझ लेते हैं। जया किशोरी जी के अनुसार, समर्पण का अर्थ है- सामने वाले की खुशियों में अपनी खुशी ढूंढना। यह एक स्वैच्छिक भाव है जिसमें आप बिना किसी दबाव के अपने साथी के प्रति समर्पित होते हैं। सच्चा समर्पण रिश्ते को मजबूती देता है, कमजोरी नहीं।

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बदलने की कोशिश छोड़ें
एक बहुत ही गहरी बात जो जया किशोरी जी अक्सर कहती हैं, वह यह है कि हम जिससे प्रेम करते हैं, उसे अपने सांचे में ढालना चाहते हैं। लेकिन प्रेम तो वह है जो व्यक्ति को वैसा ही स्वीकार करे जैसा वह है। उनकी कमियों के साथ उन्हें अपनाना ही प्रेम की पराकाष्ठा है।

विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी
बिना विश्वास के प्रेम एक ऐसे मकान की तरह है जिसकी नींव कच्ची है। जया किशोरी जी सलाह देती हैं कि अपने साथी पर इतना भरोसा रखें कि दुनिया की कोई भी अफवाह आपके रिश्ते की दीवार न हिला सके। जहां संदेह आ जाता है, वहाँ प्रेम का अंत निश्चित है।

प्रेम और ईश्वर का संबंध
जया किशोरी जी के अनुसार, यदि आपका प्रेम पवित्र है, तो वह आपको ईश्वर के करीब ले जाएगा। प्रेम में सेवा का भाव होना चाहिए। जब आप अपने साथी की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, तो वह भक्ति के समान हो जाता है।

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