Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Jun, 2026 01:38 PM

इस बार जुलाई का महीना धार्मिक और अध्यात्मिक तौर पर बहुत शुभ और खास रहने वाला है। इस माह में कई बड़े पर्व और त्योहार मनाए जाएंगे, जिसका हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है।
July Vrat Tyohar 2026 : इस बार जुलाई का महीना धार्मिक और अध्यात्मिक तौर पर बहुत शुभ और खास रहने वाला है। इस माह में कई बड़े पर्व और त्योहार मनाए जाएंगे, जिसका हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है।जुलाई के महीने में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से लेकर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा और कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं। जुलाई के महीने में ही भगवान जगन्नाथ अपनी प्रसिद्ध रथ यात्रा पर निकलेंगे, तो वहीं दूसरी ओर देवशयनी एकादशी के साथ ही भगवान विष्णु चार महीनों की योग निद्रा में चले जाएंगे, जिससे सभी मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाएगा। तो आइए देखते हैं जुलाई के महीने में पड़ने वाले प्रमुख पर्व और त्योहारों का पूरी लिस्ट।
| जुलाई व्रत त्योहार |
तारीख |
| कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी |
3 जुलाई |
| कालाष्टमी |
6 जुलाई |
| योगिनी एकादशी |
10 जुलाई |
| रवि प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि |
12 जुलाई |
| आषाढ़ अमावस्या |
14 जुलाई |
| आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ |
15 जुलाई |
| जगन्नाथ रथयात्रा एवं कर्क संक्रांति |
16 जुलाई |
| अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी |
17 जुलाई |
| भड़ली नवमी (अबूझ मुहूर्त) |
22 जुलाई |
| देवशयनी एकादशी (चातुर्मास प्रारंभ) |
25 जुलाई |
| कोकिला व्रत |
28 जुलाई 2026 |
| गुरु पूर्णिमा एवं आषाढ़ पूर्णिमा |
29 जुलाई 2026 |
जुलाई के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण उत्सवों का महत्व
विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु श्रद्धा भाव से इन रथों की डोरी को खींचता है या रथ के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह उत्सव भाई-बहन के अटूट प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।
देवशयनी एकादशी
इसे आषाढ़ी एकादशी या हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। भगवान के शयन काल में जाने के साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाता है। इन चार महीनों में विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक व शुभ कार्य पूरी तरह से बंद हो जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन सनातन धर्म के महान विद्वान और वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। यह दिन हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु के प्रति आभार व्यक्त करने का होता है। इस दिन गुरु दीक्षा लेना और अपने गुरुओं का पूजन करना बेहद फलदायी माना जाता है।
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