Edited By Sarita Thapa,Updated: 10 Aug, 2026 11:42 AM

सनातन धर्म में सावन माह के मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सावन का हर मंगलवार मां मंगला गौरी को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026 मंगलवार को रखा जाएगा।
2nd Mangla Gauri Vrat : सनातन धर्म में सावन माह के मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सावन का हर मंगलवार मां मंगला गौरी को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026 मंगलवार को रखा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो सुहागिन महिलाएं या अविवाहित कन्याएं इस दिन सच्चे मन से मां गौरी का पूजन करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुयोग्य जीवनसाथी और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत के पूजा विधि के बारे में-
तिथि और पूजा का शुभ समय
सावन दूसरा मंगला गौरी व्रत तिथि : 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04 बजकर 49 मिनट से 05 बजकर 34 मिनट तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से 03 बजकर 43 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 01मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक
दूसरे मंगला गौरी व्रत की विशेष पूजन विधि
सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या गुलाबी रंग के साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला गौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
मंगला गौरी व्रत में 16 की संख्या का विशेष महत्व होता है। पूजा में माता को 16 शृंगार की वस्तुएं, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 बताशे, 16 सुपारी और 16 तरह के फूल-फल अर्पित करें।
मां मंगला गौरी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और संभव हो तो 16 बत्तियों वाला दपक जलाएं।
धूप-दीप दिखाकर मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें और अंत में कपूर से आरती उतारें।
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