Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Oct, 2026 03:55 PM

Neelkanth Bird Dussehra 2026: विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना अत्यंत भाग्यशाली और मंगलकारी माना जाता है। जानिए, नीलकंठ पक्षी के दर्शन का धार्मिक महत्व, भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यता और दर्शन के समय जपे जाने वाले विशेष मंत्र के बारे में।
Neelkanth Bird Dussehra 2026: अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का महान पर्व 'दशहरा' (विजयादशमी) 20 अक्टूबर 2026 को देशभर में पूर्ण श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। दशहरे के दिन भगवान राम, माता सीता, श्री लक्ष्मण और हनुमान जी के पूजन का विशेष विधान है। विजयादशमी के पावन अवसर पर कई धार्मिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख मान्यता नीलकंठ पक्षी के दर्शन को लेकर है। माना जाता है कि दशहरे वाले दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना अत्यंत फलदायी और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला संकेत होता है।
घर के आसपास नीलकंठ दिखे तो मिलते हैं ये शुभ संकेत
नीलकंठ अगर भूमि पर बैठा दिखाई दे तो उस स्त्री में उदर संबंधी विकार या रोग पनपने की संभावना होती है। अगर नीलकंठ किसी वृक्ष की हरी डाली पर बैठा दिखाई दे तो यौन सुख, सूखे वृक्ष की डाली पर बैठा दिखाई दे तो यौन व्याधि या दांपत्य कलह, जलाशय के किनारे बैठा दिखाई दे तो पर-पुरुष गमन की संभावना बढ़ जाती है। नीलकंठ अगर किसी ब्याहता स्त्री सुख रहे अधोवस्त्र (पेटीकोट, ब्लाऊज, ब्रा) आदि पर आकर बैठ जाए तो उसे पुत्ररत्न की प्राप्ति अवश्य ही होती है।
कुंआरी कन्या के अधोव पर अगर नीलकंठ आकर बैठ जाता है तो यह इस बात का सूचक होता है कि उस कन्या का वैवाहिक जीवन आजीवन सुखमय एवं आनंदमय व्यतीत होगा।
अगर कोई रजस्वला कुंआरी कन्या नीलकंठ पक्षी को अपनी दाईं ओर उड़ते देखती है तो उसका विवाह शीघ्र ही होने का भाव दर्शाता है। इस कन्या के बाईं ओर नीलकंठ के उडऩे पर परभोग्या, सम्मुख उडऩे पर प्रियदर्शन तथा पीठ पीछे उडऩे पर विश्वासघात का योग बनता है।
अविवाहित कन्या के सम्मुख अगर नीलकंठ भूमि पर बैठा दिखाई दे तो यह इस बात का सूचक है कि उस कन्या की मनोकामना शीघ्र पूरी होने वाली है। अगर शुष्क काष्ठ पर नीलकंठ बैठा दिखाई दे तो कौमार्यभंग, जलाशय पर बैठा दिखाई दे तो प्रिय सहेली या नजदीकी रिश्तेदार से मिलन का योग होता है।
नीलकंठ का जूठा किया हुआ फल खाने से मनवांछित लाभ, सौभाग्यवृद्धि एवं सुखमय वैवाहिक जीवन का योग बनता है।
पुरुष द्वारा सम्मुख नीलकंठ-दर्शन शुभकारी होता है। उड़ता हुआ नीलकंठ अगर दाएं भाग में दिखाई दे तो विजय-पराक्रम, बाईं ओर का दर्शन शत्रुनाश, पृष्ठभाग का दर्शन हानिप्रद माना जाता है। भूमि पर बैठा नीलकंठ स्त्री शोक, शुष्ककाष्ठ पर बैठा नीलकंठ पुत्रशोक तथा जलाशय पर बैठा नीलकंठ-दर्शन व्यापार एवं संतति लाभ का सूचक होता है।
अगर नीलकंठ अविवाहित युवक के माथे पर से उड़ता हुआ निकल जाए तो यह अत्यंत शुभकारी माना जाता है। कामनापूर्ति, आर्थिक स्थिति में दृढ़ता तथा अतिशीघ्र वैवाहिक बंधन में बंधने की भावी सूचना का द्योतक होता है। अधोवस्त्र (जंघिया, लंगोटा, बनियान) आदि पर अगर नीलकंठ आकर बैठ जाए तो यह इस बात का सूचक होता है कि उसे स्त्री-सुख प्राप्त होना है। सावन माह में अगर किसी भी स्थिति में नीलकंठ का दर्शन हो जाए तो वह सुख-सौभाग्य समृद्धिवद्र्धक ही होता है।

भगवान शिव और श्री राम से जुड़ा पौराणिक रहस्य
धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम रावण से युद्ध के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब भगवान शिव ने नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर उन्हें दर्शन दिए थे और विजय का आशीर्वाद प्रदान किया था। इसी वजह से दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना साक्षात भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के समान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन नीलकंठ के दर्शन करता है, उस पर महादेव की अनुकंपा सदैव बनी रहती है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने पर तुरंत करें इस मंत्र का जाप
यदि आपको दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन होते हैं, तो शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इस सिद्ध मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, 'कृत्वा नीराजनं राजा बालवृद्धयं यता बलम्। शोभनम खंजनं पश्येज्जलगोगोष्ठसंनिघौ।।
नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकामफलप्रद। पृथ्वियामवतीर्णोसि खञ्जरीट नमोस्तु तो।।'
