Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Jun, 2026 02:55 PM

Mahesh Navami 2026: जानें, साल 2026 में महेश नवमी कब है? शिव-पार्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और उपाय।
Mahesh Navami 2026 Date: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे महेश नवमी के रूप में मनाया जाता है। यह पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के लिए यह दिन उत्सव की तरह होता है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन इस समाज की उत्पत्ति हुई थी। साल 2026 में यह महापर्व 23 जून को मनाया जाएगा।
Mahesh Navami Subh Muhurat महेश नवमी 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 22 जून 2026, सोमवार को दोपहर 03:39 बजे से होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 23 जून 2026, मंगलवार को शाम 04:39 बजे होगा। शास्त्रों में उदयातिथि की महत्ता के कारण महेश नवमी का पर्व और पूजन 23 जून को ही किया जाएगा।

Mahesh Navami puja 2026: सुबह स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इससे मनुष्य का स्वभाव शांत और स्नेहमय होता है। भोलेनाथ का शक्कर से अभिषेक करें। इससे सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके साथ ही मनुष्य के जीवन से दरिद्रता सदा के लिए चली जाती है। पूजा के दौरान महेश नवमी की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में माता पार्वती व शिव जी की आरती उतारें।

Mahesh Navami vrat 2026: वैसे तो इस दिन व्रत रखने का विधान है। यदि किसी कारणवश उपवास नहीं कर सकते तो पूजन और उपाय करके भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है।
शिवलिंग पर केसर अर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति को सौम्यता मिलती है।
शिवलिंग पर इत्र लगाने से व्यक्ति के विचार पवित्र और शुद्ध होते हैं।
शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य सदैव अच्छा रहता है और बीमारियां दूर होती हैं।
भगवान शिव को दही अर्पित करने से स्वभाव गंभीर होता है और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
भोलेनाथ पर घी अर्पित करने से व्यक्ति की शक्ति में वृद्धि होती है।
भगवान शिव को चंदन प्रिय है। भोलेनाथ को चंदन अर्पित करने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है।
शिवलिंग को शहद चढ़ाने से व्यक्ति की वाणी में मिठास आती है।
भगवान शिव को भांग अर्पित करें। ऐसा करने से बुराईयों का नाश होता है।
भारतीय शास्त्रों में बिल्वपत्र को भगवान शंकर की तीसरी आंख बताया गया है। उन्हें यह बहुत प्रिय है, अगर पूजा करने में बिल्वपत्र का प्रयोग किया जाए तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
