Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Oct, 2026 12:35 PM

प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू ने हनुमान चालीसा की महत्ता पर चर्चा करते हुए फ्लाईदुबई विमान के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छार की घटनी ने दुनिया के सामने हनुमान चालीसा की उपयोगिता और उसके...
Morari Bapu Hanuman Chalisa Meaning : प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू ने हनुमान चालीसा की महत्ता पर चर्चा करते हुए फ्लाईदुबई विमान के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छार की घटनी ने दुनिया के सामने हनुमान चालीसा की उपयोगिता और उसके आध्यात्मिक महत्व को सामने लाने का काम किया है। मोरारी बापू के अमुसार, संकट की घड़ी में हनुमान चालीसा के प्रति लोगों की आस्था और उसके महत्व पर नए सिरे से चर्चा हुई है। उन्होंने हनुमान जी से जुड़ी भक्ति परंपरा को लोककल्याण की भावना से जोड़ते हुए कहा कि आध्यातेमिक ऊर्जा का उपुयोग समाज और पूरी दुनिया की भलाई के लिए किया जाना चाहिए।
युवाओं को अपनी ऊर्जा समाज के हित में लगाने का संदेश
मोरारी बापू ने कन्याकुमारी से शुरू हुई भारत स्वस्तिक यात्रा के अवसर पर युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों और जनकल्याण के लिए इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। करीब 9,000 किलोमीटर की यह यात्रा 23 अक्टूबर को केदारनाथ में संपन्न होने वाली है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत को आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में जोड़ना है।
क्या तुलसीदास स्त्री विरोधी थे? मोरारी बापू ने कही यह बात
अपने संबोधन में मोरारी बापू ने गोस्वामी तुलसीदास को स्त्री विरोधी बताने वाली धारणाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राय बनाने से पहले लोगों को श्रीरामचरितमानस का अध्ययन करना चाहिए। उनके मुताबिक, तुलसीदास ने ग्रंथ की शुरुआत में भगवान शिव से पहले शक्ति और भगवान राम से पहले सीता की वंदना की है। यह बात उनके काव्य में नारी शक्ति और श्रद्धा के स्थान को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
लोकभाषा में रचना ने रामचरितमानस को बनाया लोकप्रिय
मोरारी बापू ने रामचरितमानस की लोकप्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि लोकभाषा में रचना होने के कारण यह ग्रंथ आम लोगों तक पहुंच सका। उन्होंने भारत की विविधता में एकता की विशेषता पर भी जोर दिया और कहा कि देश की सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को केवल आर्थिक और भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध बनाने की आवश्यकता है। उनके विचार में आध्यात्मिक चेतना समाज को जोड़ने और विश्व कल्याण की भावना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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