We are not vishwaguru anymore: मुरली मनोहर जोशी ने कहा, हम अब विश्वगुरु नहीं हैं, संस्कृत को बढ़ावा देने की आवश्यकता

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 10:30 AM

murli manohar joshi

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और ‘क्वांटम कंप्यूटिंग’ में भी इसके उपयोग की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि भारत अब विश्वगुरु नहीं है और इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली (प.स.): भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और ‘क्वांटम कंप्यूटिंग’ में भी इसके उपयोग की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि भारत अब विश्वगुरु नहीं है और इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। 

जोशी ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि भीम राव आंबेडकर सहित कई लोगों ने अतीत में इसके लिए प्रयास किए थे, लेकिन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली। 

 वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) से संबद्ध संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। 
     
भारत के विश्वगुरु के रूप में उभरने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने के दौरान संस्कृत के संवर्धन में देश की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘यह धारणा कि हम विश्वगुरु हैं... मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना ​​है कि वर्तमान में हमें इस शब्द का प्रयोग करने से परहेज करना चाहिए।’ 

भागवत ने भी दिया भारत में संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार पर जोर
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश में संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार की सोमवार को पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके प्रसार में वृद्धि न केवल अन्य सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगी और उनके बीच एक सेतु का काम करेगी, बल्कि लोगों को भारत के प्राचीन विचारों और संस्कृति से भी जोड़ेगी।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!