Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बनेंगे 3 बेहद शुभ योग, जानें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का महत्व और विष्णु कृपा पाने के अचूक उपाय

Edited By Updated: 05 Jun, 2026 03:42 PM

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Nirjala Ekadashi 2026 Date Shubh Muhurat Significance and Rituals: जानें 25 जून 2026 को पड़ने वाली निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त, 3 बड़े राजयोग और भगवान विष्णु की कृपा पाने के विशेष उपाय। भीमसेनी एकादशी का महत्व और दान की महिमा।

Nirjala Ekadashi 2026 Date Shubh Muhurat Significance and Rituals: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में यह व्रत 25 जून को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखता है, उसे साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल अकेले इसी व्रत से प्राप्त हो जाता है।

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साल 2026 की एकादशी पर 3 महासंयोग
इस वर्ष निर्जला एकादशी का महत्व ज्योतिषीय दृष्टि से कई गुना बढ़ गया है। 25 जून 2026 को गुरुवार का दिन है, जो स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित है। इसके अलावा इस दिन निम्नलिखित शुभ योग बन रहे हैं:

लक्ष्मी नारायण योग: कर्क राशि में शुक्र और बुध की युति से इस योग का निर्माण हो रहा है, जो धन और ऐश्वर्य के लिए अत्यंत शुभ है।
स्वाति नक्षत्र व शिव योग: इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ शिव योग और सिद्ध योग का भी अद्भुत संयोग विद्यमान रहेगा। 
विष्णु-गुरु संयोग: गुरुवार के दिन एकादशी पड़ने से यह साधना और सिद्धि के लिए श्रेष्ठ फलदायी मानी गई है।

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विष्णु कृपा पाने के लिए निर्जला एकादशी पर राशि अनुसार करें ये दान
पद्मपुराण के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत के प्रभाव से जहां मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं अनेक रोगों की निवृत्ति एवं सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस व्रत के प्रभाव से चतुर्दशीयुक्त अमावस्या को सूर्यग्रहण के समय श्राद्ध करके मनुष्य जिस फल को प्राप्त करता है, वही फल इस व्रत की महिमा सुनकर मनुष्य पा लेता है। करोड़ों गोदान करने तथा सैंकड़ों अश्वमेध यज्ञ करने के समान इस व्रत का पुण्यफल है। विभिन्न प्रकार के अन्न एवं वस्त्रों से ब्राह्मणों को प्रसन्न एवं संतुष्ट करने वाले प्राणियों के लिए यह व्रत किसी रामबाण से कम नहीं है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य की बीती हुई तथा आने वाली 100 पीढ़ियों को भगवान वासुदेव के परमधाम की प्राप्ति होती है। व्रत रखने के साथ-साथ दान का भी अत्यधिक महत्व है।

निर्जला एकादशी का व्रत जल के महत्व को दर्शाने वाला बताया गया है। ये व्रत ज्‍येष्‍ठ मास में पड़ने के कारण शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान करना सबसे शुभ माना जाता है। मान्‍यता है कि इस महीने में तेज गर्मी पड़ती है और सूर्य अपनी पूर्ण गर्मी पर होता है। इसलिए निर्जला एकादशी पर गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं का दान करना सबसे शुभ माना जाता है।

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मेष : 7 तरह के अनाजों का दान करें।

वृष : सफेद या पीले वस्त्र।

मिथुन : हरे फल, आम, खरबूजा। 

कर्क : जल की व्यवस्था, वाटर कूलर, पंखे, कूलर का दान।

सिंह : एयर कंडीशनर या धर्म स्थानों पर विद्युत उपकरण, जीवन में सुख-समृद्घि एवं वृद्धि लाएंगे।

कन्या: अनाथालय या लंगर में हरी सब्जियां व खरबूजे दान करें।

तुला : मीठे जल या पेय की छबील लगाएं।

वृश्चिक : भगवान विष्णु का स्मरण और तरबूज।

धनु : पीला ठंडा केसर युक्त दूध।

मकर : छतरी, जल पात्र, कलश, छायादार पौधारोपण या शैल्टर का निर्माण कर सकते हैं।

कुंभ : जल से भरा कुंभ, कूलर, फ्रिज, वाटर कूलर, एंबुलैंस वाहन।

मीन : ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ का पाठ और ‘सर्व भूत हिते रता:’  की भावना से सार्वजनिक स्थान पर पीपल का पेड़ लगाना आपको निरोगी काया देगा और अन्य को छाया देगा।

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