Premanand Maharaj News: नजर लगने का भ्रम क्यों है गलत? प्रेमानंद महाराज ने समझाया सच

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 12:30 PM

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Premanand Maharaj Pravachan: जब भी जीवन में कोई काम बिगड़ता है, अचानक बीमारी आ जाती है या बनते-बनते हालात हाथ से निकल जाते हैं, तो अक्सर लोग यही कहते हैं, “लगता है किसी की बुरी नजर लग गई।” गांव हो या शहर, यह धारणा समाज में गहराई से बैठी हुई है।

Premanand Maharaj Pravachan: जब भी जीवन में कोई काम बिगड़ता है, अचानक बीमारी आ जाती है या बनते-बनते हालात हाथ से निकल जाते हैं, तो अक्सर लोग यही कहते हैं, “लगता है किसी की बुरी नजर लग गई।” गांव हो या शहर, यह धारणा समाज में गहराई से बैठी हुई है। लेकिन क्या वाकई किसी की नजर हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती है, या इसके पीछे हमारे अपने कर्म जिम्मेदार होते हैं? इसी सवाल पर वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने सत्संग में बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।

Premanand Maharaj Teachings: सरल शब्दों में गहरा जीवन दर्शन
प्रेमानंद महाराज अपने सहज, सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। उनके विचार केवल धर्म तक सीमित नहीं होते, बल्कि सीधे व्यक्ति के जीवन और मानसिक स्थिति को छूते हैं। वे उन सवालों के उत्तर देते हैं, जो हर आम इंसान के मन में रोज़ उठते हैं जैसे दुख क्यों आता है, असफलता का कारण क्या है और डर से कैसे बाहर निकला जाए।

भक्त का सवाल: क्या सच में बुरी नजर लगती है?
हाल ही में एक सत्संग के दौरान एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया। भक्त ने कहा कि गांवों और शहरों में अक्सर बीमारी, आर्थिक नुकसान या काम में रुकावट आने पर लोग इसे बुरी नजर का परिणाम मान लेते हैं। उसने पूछा, “महाराज जी, क्या सच में किसी की बुरी नजर हमारे काम बिगाड़ सकती है?”

Premanand Maharaj Answer: नजर नहीं, कर्मों का फल है सब कुछ
प्रेमानंद महाराज ने मुस्कुराते हुए बहुत सरल शब्दों में इस भ्रम को दूर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में जो भी सुख या दुख आता है, उसका मूल कारण उसके अपने कर्म होते हैं।

महाराज ने समझाया कि जब हम किसी असफलता का सामना करते हैं, तो ‘बुरी नजर’ या ‘दुर्भाग्य’ कहकर हम अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। जबकि वास्तव में हमारे वर्तमान या पूर्व जन्मों के कर्म ही जीवन में फल के रूप में सामने आते हैं।

ईश्वर से जुड़ाव है सबसे बड़ा कवच
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति ईश्वर से जुड़ा हुआ है, उस पर कोई भी नकारात्मक शक्ति प्रभाव नहीं डाल सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि जब भी घर से बाहर निकलें, प्रभु का नाम जपते हुए निकलें। ईश्वर का नाम एक ऐसा अदृश्य कवच है, जिसे कोई भी नजर या नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।

नकारात्मक सोच से बनती हैं असली बाधाएं
महाराज ने यह भी बताया कि जैसे ही व्यक्ति यह मान लेता है कि उसे बुरी नजर लग गई है, उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। डर और शंका की स्थिति में व्यक्ति अपना पूरा सामर्थ्य नहीं लगा पाता और परिणामस्वरूप काम सच में बिगड़ने लगता है। यह नजर का असर नहीं, बल्कि नकारात्मक सोच का परिणाम होता है।

Radha Naam Jap: भय से मुक्ति का सरल उपाय
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि मन में डर या आशंका बैठ गई है, तो राधा नाम का जाप शुरू कर दें। जो व्यक्ति ईश्वर की शरण में होता है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। टोने-टोटकों और नजर के भय में जीने के बजाय सत्य, सेवा और सुमिरन का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि आपके कर्म शुद्ध हैं और आपके मुख पर ईश्वर का नाम है, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती।

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