Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Mar, 2026 03:21 PM

चैत्र नवरात्रि 2026 के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी का मंदिर अलौकिक आभा से जगमगा उठा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व के लिए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं की हैं, जिससे श्रद्धालुओं को न केवल...
Shri Mata Chintpurni Mandir : चैत्र नवरात्रि 2026 के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी का मंदिर अलौकिक आभा से जगमगा उठा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व के लिए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं की हैं, जिससे श्रद्धालुओं को न केवल सुगम दर्शन होंगे, बल्कि उन्हें एक दिव्य अनुभव भी प्राप्त होगा।
विदेशी फूलों और रंगीन रोशनी से सजा भवन
इस बार मां के दरबार को सजाने के लिए विशेष रूप से देश-विदेश से मंगाए गए ताजे फूलों का उपयोग किया गया है। नीदरलैंड और थाईलैंड जैसे देशों से आए ऑर्किड, कार्नेशन और लिली के साथ-साथ देशी गेंदे और गुलाब की महक से पूरा परिसर सराबोर है। पहली बार मंदिर के मुख्य भवन के साथ-साथ पूरे बाजार मार्ग को भी रंग-बिरंगी लाइटों और लड़ियों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो रात के समय बेहद मनमोहक दिखाई देता है।
दर्शन के लिए स्मार्ट और सुगम व्यवस्था
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने स्मार्ट मैनेजमेंट पर जोर दिया है। अव्यवस्था से बचने के लिए श्रद्धालुओं को दर्शन पर्ची लेने के बाद ही कतार में लगने की अनुमति दी जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र को चार अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है, जिसकी निगरानी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। 300 से अधिक पुलिस और होमगार्ड के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं
भरवाईं के पास वाहनों के लिए विशाल पार्किंग बनाई गई है, ताकि मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति न बने। पूरे मार्ग पर सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी डिस्पेंसरी और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रशासन के अनुसार, सुबह की आरती साढ़े पांच बजे और शाम की आरती रात आठ बजे के करीब होगी। भीड़ की स्थिति के अनुसार मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुले रहेंगे।
शोर और प्रदूषण पर पाबंदी
मेला क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए मंदिर न्यास के अलावा किसी अन्य द्वारा लाउडस्पीकर के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, ढोल-नगाड़ों और चिमटा बजाने पर भी रोक है, ताकि मंदिर की शांति और गरिमा बनी रहे।
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