Petitioner wasting time: सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने संबंधी याचिका खारिज

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 10:02 AM

son of the nation

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (आई.एन.ए.) को भारत की आजादी का श्रेय देने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने...

नई दिल्ली (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (आई.एन.ए.) को भारत की आजादी का श्रेय देने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को अदालत का समय बर्बाद करने के लिए फटकार लगाई। 

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘हम शीर्ष न्यायालय में आपके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा देंगे। हम पहले भी इसी तरह की याचिका खारिज कर चुके हैं।’  

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पहले भी निरर्थक जनहित याचिकाएं दाखिल करने के लिए फटकार लगाई जा चुकी है। 

याचिका में यह अनुरोध किया गया था कि आधिकारिक रूप से यह घोषित किया जाए कि नेताजी की आई.एन.ए. ने 1947 में भारत को आंग्रेज शासन से स्वतंत्र कराया इसलिए उन्हें ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित किया जाए।

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