Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Jan, 2026 07:53 AM

Republic Day 2026: भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा केवल देश की पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और वैदिक परंपरा का भी प्रतीक है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाने वाला तिरंगा ज्योतिष,...
Republic Day 2026: भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा केवल देश की पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और वैदिक परंपरा का भी प्रतीक है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाने वाला तिरंगा ज्योतिष, ग्रहों और देवियों से भी गहराई से जुड़ा माना जाता है। इसके तीनों रंग — केसरिया, सफेद और हरा, जीवन के तीन मूल तत्वों और तीन देवियों के प्रतीक हैं, जबकि बीच में स्थित अशोक चक्र निरंतर प्रगति और धर्म का संदेश देता है।

सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज नहीं, भारत की आध्यात्मिक पहचान है तिरंगा
हर देश का राष्ट्रीय ध्वज उसकी आत्मा को दर्शाता है। भारत का तिरंगा वेदांत, सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। इसके तीन रंग त्याग, ज्ञान और विकास जैसे जीवन के मूल स्तंभों को दर्शाते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से तिरंगे का हर रंग एक ग्रह, एक ऊर्जा और एक देवी से जुड़ा माना जाता है।
केसरिया रंग का ज्योतिष महत्व
तिरंगे का सबसे ऊपर स्थित केसरिया रंग त्याग, बलिदान और साहस का प्रतीक है। वैदिक ज्योतिष में इसका संबंध सूर्य और मंगल ग्रह से माना जाता है। सूर्य आत्मबल, नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक है। मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है। यह रंग राष्ट्र के नागरिकों में देशभक्ति, उत्साह और दृढ़ संकल्प की भावना जागृत करता है।
केसरिया रंग और देवी लक्ष्मी का संबंध
आध्यात्मिक रूप से केसरिया रंग देवी लक्ष्मी से जुड़ा है। यह रंग धन, समृद्धि, आंतरिक सुख और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह व्यक्ति को उसकी अंतर्निहित शक्ति और क्षमता की याद दिलाता है।

सफेद रंग का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय अर्थ
तिरंगे के मध्य स्थित सफेद रंग शांति, सत्य और पवित्रता का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सफेद रंग का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है। चंद्रमा मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। शुक्र प्रेम, सौंदर्य और सामंजस्य का कारक है। यह रंग देश की एकता, अहिंसा और सत्य के सिद्धांत को दर्शाता है।
सफेद रंग और देवी सरस्वती
सफेद रंग को ज्ञान की देवी सरस्वती का प्रतीक माना गया है। यह सत्व गुण, विवेक और शुद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। हंस और गाय जैसे पवित्र प्रतीक भी इसी रंग से जुड़े हैं, जो सही और गलत के बीच भेद करना सिखाते हैं।
हरा रंग और समृद्धि का प्रतीक
तिरंगे का निचला रंग हरा समृद्धि, प्रगति और जीवन शक्ति का प्रतीक है। वैदिक ज्योतिष में इसका संबंध बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। बुध बुद्धि, संचार और संतुलन का कारक है। हरा रंग सकारात्मक सोच, विकास और रचनात्मकता को बढ़ाता है।

प्रकृति देवी से जुड़ा हरा रंग
सनातन परंपरा में प्रकृति को देवी जगदंबा का स्वरूप माना गया है। हरा रंग कृषि, हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। यह भारत की कृषि संस्कृति और प्रकृति से जुड़े जीवन दर्शन को दर्शाता है।
अशोक चक्र: धर्म और निरंतर प्रगति का संदेश
सफेद पट्टी के मध्य स्थित नीला अशोक चक्र अनुशासन, कर्तव्य और निरंतर गति का प्रतीक है।
ज्योतिष के अनुसार नीला रंग
शनि ग्रह से जुड़ा है (धैर्य और कर्म)
गुरु ग्रह से जुड़ा है (ज्ञान और आध्यात्मिक विस्तार)
अशोक चक्र हमें यह संदेश देता है कि जीवन में ठहराव नहीं, बल्कि धर्म के मार्ग पर चलते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना ही प्रगति है।
