Edited By Niyati Bhandari,Updated: 31 Aug, 2026 07:27 AM

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के दबाव से बचाने के लिए अब प्रवेश और निकास व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) ने ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी यानी एक समय में स्मारक में...
आगरा (इंट): दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के दबाव से बचाने के लिए अब प्रवेश और निकास व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) ने ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी यानी एक समय में स्मारक में सुरक्षित रूप से मौजूद रह सकने वाले पर्यटकों की अधिकतम संख्या निर्धारित करने की जिम्मेदारी आई.आई.टी. दिल्ली को सौंपी है। अध्ययन के आधार पर तय होगा कि एक समय में ताजमहल परिसर और मुख्य मकबरे में कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है।
प्रवेश से निकास तक हर व्यवस्था की होगी जांच
आई.आई.टी. दिल्ली की टीम ताजमहल में पर्यटकों की आवाजाही का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसमें प्रवेश और निकास मार्ग, टिकटिंग व्यवस्था, सुरक्षा जांच तथा अलग-अलग स्थानों पर भीड़ के दबाव को देखा जाएगा। प्रति घंटे कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जाए और मुख्य मकबरे में पर्यटकों के रुकने की अधिकतम अवधि कितनी हो, इसका भी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके अलावा पीक सीजन, रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग समय स्लॉट अथवा चरणबद्ध टिकट व्यवस्था लागू करने की जरूरत का भी अध्ययन होगा।
संगमरमर और पच्चीकारी पर भीड़ का असर भी जांचेंगे
अध्ययन सिर्फ पर्यटकों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा। ताजमहल के संगमरमर, पत्थरों और पच्चीकारी पर बढ़ती भीड़ के प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पैदा होने वाली आर्द्रता और पर्यावरणीय बदलाव स्मारक को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं, इसका भी अध्ययन रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। ए.एस.आई. की अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. स्मिथा एस. कुमार के अनुसार आई.आई.टी. दिल्ली से कैरिंग कैपेसिटी का अध्ययन कराने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बजट आबंटन के लिए भेजा गया है। टीम जल्द अध्ययन शुरू करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद करीब 6 माह के भीतर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।

2015 में भी हुआ था अध्ययन
ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी और भीड़ प्रबंधन को लेकर वर्ष 2015 में नैशनल एनवायरनमैंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) भी अध्ययन कर चुका है। उस समय एक साथ करीब 9,000 पर्यटकों की सीमा और प्रति घंटे अधिकतम 6,000 पर्यटकों के प्रवेश का सुझाव दिया गया था। नीरी ने भीड़ नियंत्रित करने के लिए डिजिटल डिस्प्ले और चरणबद्ध टिकटिंग व्यवस्था की सिफारिश भी की थी। हालांकि अब करीब एक दशक बाद पर्यटकों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और स्मारक पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नए सिरे से मानक तय किए जाएंगे।

नई व्यवस्था से भीड़ और स्मारक दोनों को राहत
आई.आई.टी. दिल्ली की रिपोर्ट आने के बाद ताजमहल में पर्यटकों की संख्या को वैज्ञानिक आधार पर नियंत्रित करने की व्यवस्था तैयार होगी। इसका उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के साथ-साथ ऐतिहासिक स्मारक की संरचना को अत्यधिक भीड़ के संभावित नुकसान से बचाना है।
नई व्यवस्था लागू होने पर प्रवेश, मुख्य मकबरे में ठहराव और निकास तीनों स्तरों पर भीड़ का दबाव नियंत्रित किया जा सकेगा।
