Yamuna Jayanti 2026: चैत्र की छठ पर मनाई जाती है यमुना जयंती, जानें कब मनाया जाएगा श्री यमुना महारानी का महोत्सव

Edited By Updated: 13 Mar, 2026 09:59 AM

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Yamuna Jayanti 2026 यमुना जयंती 2026: सनातन धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन यमुना जयंती मनाई जाती है, जिसे यमुना छठ भी कहा जाता है। यह पर्व यमुना माता को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में केवल एक नदी नहीं...

Yamuna Jayanti 2026 यमुना जयंती 2026: सनातन धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन यमुना जयंती मनाई जाती है, जिसे यमुना छठ भी कहा जाता है। यह पर्व यमुना माता को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में केवल एक नदी नहीं बल्कि पवित्र देवी के रूप में पूजा जाता है।

इस दिन श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान करते हैं, दीपदान करते हैं और माता यमुना की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यमुना माता की पूजा करने से सुख, समृद्धि और परिवार में खुशहाली आती है। यह पर्व विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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यमुना जयंती 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि इस प्रकार रहेगी—
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च 2026, शाम 06:38 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 24 मार्च 2026, शाम 04:07 बजे
उदयातिथि के अनुसार 24 मार्च 2026 को यमुना जयंती मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को यमुना नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन को उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है।

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क्यों मनाई जाती है यमुना जयंती?
हिंदू मान्यता के अनुसार यमुना माता सूर्य देव की पुत्री और मृत्यु के देवता यमराज की बहन हैं। इसलिए उन्हें अत्यंत पवित्र माना जाता है।

यमुना जयंती के दिन भक्त यमुना नदी में स्नान करके पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना करते हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से दीपदान और पूजा-अर्चना की जाती है।

इस समय चैती छठ महापर्व भी मनाया जाता है, इसलिए कई स्थानों पर यमुना जयंती का उत्सव और भी भव्य हो जाता है।

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क्या यमुना थीं भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी?
पौराणिक कथा के अनुसार यमुना माता का भगवान विष्णु के प्रति गहरा प्रेम था। उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की।

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि द्वापर युग में जब वे श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेंगे, तब वे उन्हें प्राप्त होंगी।

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श्रीकृष्ण और यमुना के विवाह की कथा
द्वापर युग में एक बार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन वन में घूम रहे थे। तभी श्रीकृष्ण को प्यास लगी और वे जल की तलाश में आगे बढ़े।

कुछ दूरी पर उन्हें एक अत्यंत सुंदर स्त्री दिखाई दी, जो भगवान विष्णु की तपस्या कर रही थी। जब श्रीकृष्ण ने उनसे परिचय पूछा तो उन्होंने बताया कि वे यमुना हैं और भगवान विष्णु को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों से तपस्या कर रही हैं।

यमुना माता ने कहा कि यदि इस जन्म में भी उन्हें विष्णु नहीं मिले तो वे जीवनभर तपस्या करती रहेंगी।

तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण ने यमुना माता से विवाह कर लिया।

धार्मिक महत्व
मान्यता है कि यमुना जयंती के दिन स्नान, पूजा और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से यमुना माता की पूजा करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।

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