Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Mar, 2026 04:08 PM

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति की तिथि को बेहद पवित्र माना गया है। जब प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं, तो उसे संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।
Meen Sankranti 2026 : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति की तिथि को बेहद पवित्र माना गया है। जब प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं, तो उसे संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इसी क्रम में, जब सूर्य कुंभ राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मीन संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 की मीन संक्रांति कई मायनों में खास है। यह न केवल सौर वर्ष के अंतिम महीने की शुरुआत है, बल्कि इसके साथ ही खरमास का आगाज भी हो जाता है, जिससे मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय स्वयं को ईश्वर की भक्ति में लीन करने और दान-पुण्य के जरिए पुण्य संचय करने का होता है। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में मीन संक्रांति के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
Meen Sankranti Shubh Muhurat मीन संक्रांति शुभ मुहूर्त
पुण्य काल मुहूर्त: सूर्य देव की उपासना और दान-पुण्य के लिए सुबह 06 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ है। इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है।
महा पुण्य काल: यदि आप सबसे उत्तम समय की तलाश में हैं, तो सुबह 06 बजकर 41 मिनट से सुबह 08 बजकर 41 मिनट तक का मुहूर्त महा पुण्य काल रहेगा। आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है।
संक्रांति क्षण: सूर्य का राशि परिवर्तन तकनीकी रूप से देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा, लेकिन उदय तिथि और शास्त्रों के अनुसार, अगले दिन सूर्योदय के साथ ही स्नान और दान की परंपरा निभाई जाएगी।

Significance of Meen Sankranti मीन संक्रांति का महत्व
मीन संक्रांति के साथ ही खरमास की शुरुआत भी हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सूर्य की गति धीमी मानी जाती है, इसलिए अगले एक महीने तक शादी-ब्याह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि, यह समय दान, जप और तप के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
Meen Sankranti Puja Vidhi मीन संक्रांति पूजा विधि
मीन संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ होता है। यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालें। 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें।
इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करने से यश और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
इस दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, अनाज और लाल वस्त्र दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
मीन संक्रांति पर गाय को हरा चारा खिलाने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।

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