Braj Holi 2026 : मथुरा-वृंदावन में भक्ति और रंगों का अद्भुत संगम, बांके बिहारी मंदिर में नई व्यवस्था के साथ मनाई जाएगी रंगभरी एकादशी

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 09:16 AM

braj holi 2026

मथुरा-वृंदावन में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 का उत्सव इस बार नई ऊर्जा और नई व्यवस्थाओं के साथ मनाया जा रहा है। ब्रज की 40 दिवसीय होली का असली उल्लास इसी दिन से परवान चढ़ता है, जब बांके बिहारी मंदिर में रंग और गुलाल की आधिकारिक शुरुआत होती है।

Braj Holi 2026 : मथुरा-वृंदावन में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 का उत्सव इस बार नई ऊर्जा और नई व्यवस्थाओं के साथ मनाया जा रहा है। ब्रज की 40 दिवसीय होली का असली उल्लास इसी दिन से परवान चढ़ता है, जब बांके बिहारी मंदिर में रंग और गुलाल की आधिकारिक शुरुआत होती है। भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 

भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए मंदिर में प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग रखे गए हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष समय अंतराल या अलग कतार की व्यवस्था की गई है। ठाकुर जी इस दिन सोने की पिचकारी से भक्तों पर टेसू के फूलों से बना प्राकृतिक रंग बरसाएंगे। मंदिर के पुजारियों द्वारा गर्भगृह से भक्तों पर गुलाल की बौछार की जाएगी। रंगभरी एकादशी के विशेष अवसर पर दर्शन का समय सुबह 08:45 से दोपहर 01:00 और शाम 04:30 से रात 08:30 तक रखा गया है।

वृंदावन की फूलों वाली होली
रंगभरी एकादशी के दिन ही वृंदावन में विश्व प्रसिद्ध फूलों वाली होली' का आयोजन होता है। बांके बिहारी मंदिर और राधा वल्लभ मंदिर में रंगों की जगह क्विंटल के हिसाब से गुलाब और गेंदे की पंखुड़ियां भक्तों पर उड़ाई जाती हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान अपने भक्तों के साथ प्रेम के पुष्पों से होली खेलते हैं, जो देखने में किसी दिव्य नजारे जैसा लगता है।

मथुरा और पूरे ब्रज में उल्लास
मथुरा में जन्मभूमि परिसर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। यहाँ 'होली रसिया' और 'चर्कुला नृत्य' के साथ अबीर-गुलाल की होली खेली जाएगी। मथुरा के राजाधिराज द्वारकाधीश मंदिर में भी सुबह की आरती के बाद ढप और चंग की थाप पर होली का गायन शुरू होगा।

भक्तों के लिए विशेष सुझाव
मंदिर प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु अपने साथ बैग, कीमती सामान या मोबाइल फोन न लाएं। साथ ही, हृदय रोगियों और सांस की तकलीफ वाले व्यक्तियों को भीड़ वाले समय में मंदिर आने से बचने की सलाह दी गई है।
 

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