Edited By Prachi Sharma,Updated: 17 Jul, 2026 01:07 PM

Avika Gor : बालिका बधु नाटक से अपनी पहचान बनाने वाली आनंदी यानि अविका गौर अपने सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ ऐसी बातें शेयर कि हैं उनके फैंस चिंता में आ गए हैं।
Avika Gor : बालिका बधु नाटक से अपनी पहचान बनाने वाली आनंदी यानि अविका गौर अपने सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ ऐसी बातें शेयर कि हैं उनके फैंस चिंता में आ गए हैं। उस पोस्ट में उन्होंने बताया कि भीड़ में रहने के बावजूद भी वो खुद को काफी अकेला महसूस करती हैं। कभी-कभी कुछ चीजे ऐसी होती हैं, जिन्हे व्यक्ति चाह के भी समझ नहीं पाता।
अविका गौर ने सोशल मीडिया पर शेयर की अपनी फीलिंग्स
अविका ने लिखा कि- आप असल में हर किसी की कहानी में एक अलग किरदार होते हैं। किसी के लिए मजाकिया दोस्त, किसी के लिए शांत स्वभाव वाले तो किसी के लिए बेहद डरावने और किसी के लिए वो इंसान, जिसके बारे में उन्होंने सोचा था कि "तुम अलग होगे।"
लेकिन इन्ही सब बातों के बीच आप खुद को समझने की कोशिश करते हो।
शायद यही वजह है कि हर किसी को खुश रखना या खुद को पूरी तरह समझ पाना नामुमकिन है क्योंकि हर इंसान अपनी जिंदगी के अलग-अलग अध्याय पढ़ रहा होता है।
हममें से कई लोग अनजाने में ऐसे बन जाते हैं कि हर बातचीत को आगे बढ़ाने और माहौल संभालने की जिम्मेदारी खुद पर ले लेते हैं और जिन दिनों हमारे अंदर ऊर्जा नहीं होती ....
लोग सिर्फ इसलिए पूछने लगते हैं कि सब ठीक है ना ? क्योंकि उस दिन हम उतने उत्साहित या जोशीले नहीं दीखते। फिर हमें डर लगने लगता है कि कहीं लोग हमें पसंद करना बंद न करे दें।
शायद लोगों का प्यार हमें हमारे असली व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि हमारे मनोरंजक और खुशमिजाज़ रूप से मिला है। क्या हम बिना कोई मुखौटा पहने, अपनी भावनाओं के बारे में पूरी ईमानदारी से बात कर सकते हैं?

पूरी जिंदगी सिर्फ करियर पर दिया ध्यान
अविका ने अपने पोस्ट में बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय अपने करियर को संवारने में लगा दिया। हालांकि, समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि ऐसे सच्चे और निस्वार्थ लोग मिलना बेहद मुश्किल होता है, जो बिना किसी स्वार्थ या शर्त के आपकी जिंदगी का हिस्सा बनना चाहें। उन्होंने कहा कि करियर की दौड़ में यह बात उन्हें बहुत बाद में समझ आई।