आखिरी सवाल सिर्फ फिल्म नहीं, इतिहास और विचारधारा से जुड़ा विषय है : अमित साध

Edited By Updated: 15 May, 2026 11:40 AM

exclusive interview with starcast of akhiri sawal

फिल्म आखिरी सवाल के बारे में स्टारकास्ट ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त स्टारर फिल्म आखिरी सवाल 15 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस राजनीतिक ड्रामा ने अपनी दमदार कहानी, तीखे संवाद और शानदार ट्रेलर की बदौलत सोशल मीडिया से लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा पैदा कर दी है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता अभिजीत मोहन वारंग की ओर से निर्देशित आखिरी सवाल में संजय दत्त के अलावा अमित साध, नीतू चंद्रा और त्रिधा चौधरी जैसे कलाकारों की टोली है। फिल्म के बारे में स्टारकास्ट ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...


अमित साध

सवाल: संजय दत्त और निखिल नंदा के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
यह अनुभव मेरे लिए बेहद खास और भावुक करने वाला रहा। जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनकी हम कल्पना करते हैं और कुछ ऐसी जो बिना मांगे मिल जाती हैं। संजय दत्त सर मेरे बचपन के पसंदीदा सुपरस्टार रहे हैं। उन्हें देखकर बड़े हुए हैं और आज उनके साथ एक फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं है। इसके अलावा निखिल भैया के साथ भी यह मेरी पहली फिल्म है। मैं उनका बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस कहानी का हिस्सा बनाया। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि इतिहास और विचारधारा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। मुझे लगता है कि मेरा किरदार पूरी कहानी को जोड़ने का काम करता है।

सवाल: फिल्म में आपके किरदार की तैयारी कैसे हुई?
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी रिसर्च है। निखिल भैया, निर्देशक अभिजीत और लेखक उत्कर्ष ने इस पर काफी मेहनत की है। जब मेरे पास स्क्रिप्ट आई तो उसमें इतना दम था कि किरदार खुद ही समझ आने लगा।
मैं हमेशा मानता हूं कि एक अच्छी स्क्रिप्ट ही सबसे बड़ी तैयारी होती है। शूटिंग से पहले मैंने निर्देशक अभिजीत जी के साथ कई रिहर्सल किए। मुझे सही सुर पकड़ना था। जब मैंने उन्हें अपना सीन करके दिखाया तो उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, बस यही चाहिए था। एक कलाकार के लिए इससे बड़ी तारीफ कुछ नहीं होती।

अभिजीत वारंग

सवाल: यह विषय काफी संवेदनशील है। आपने कैसे सुनिश्चित किया कि फिल्म विवाद का कारण न बने?
देखिए, यह विवाद पैदा करने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि संवाद करने वाली फिल्म है। हमने वही दिखाया है जिसे हमने रिसर्च के जरिए समझा और जाना। इतिहास के कई हिस्सों को लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया। आज बहुत सी जानकारी सार्वजनिक मंचों पर मौजूद है, लेकिन लोग उसे गहराई से नहीं जानते। हमें लगा कि फिल्म के जरिए उन बातों को सामने लाया जाए। अगर कोई फिल्म देखने के बाद सवाल पूछता है तो हमारे पास हर सवाल का जवाब है, क्योंकि हमने पूरी तैयारी और रिसर्च के साथ यह फिल्म बनाई है।

सवाल: फिल्म रिलीज के बाद अगर विवाद होता है तो क्या आप तैयार हैं?
बिल्कुल तैयार हैं। लेकिन हमें विश्वास है कि फिल्म देखने के बाद लोगों को कई सवालों के जवाब मिल जाएंगे। यह फिल्म बनाना आसान नहीं था। इसमें कोई एक्शन या मसाला नहीं है, बल्कि सिर्फ संवाद और विचार हैं। इसलिए स्क्रिप्ट पर सबसे ज्यादा मेहनत की गई है। अगर कोई फिल्म देखे बिना आरोप लगाता है तो वह गलत होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ एक है लोगों तक जानकारी और संवाद पहुंचाना।

नीतू चंद्रा श्रीवास्तव

सवाल: आप लंबे समय बाद वापसी कर रही हैं। इस फिल्म को करने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
मैं थिएटर और कुछ दूसरे प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थी। लेकिन जब निखिल जी ने इस फिल्म की कहानी सुनाई तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक मजबूत विचार है। इसके अलावा संजय दत्त सर के साथ काम करने का अनुभव हमेशा खास रहा है। मैं उन्हें सिर्फ एक बड़े अभिनेता नहीं, बल्कि एक संरक्षक की तरह देखती हूं। विदेश में शूटिंग के दौरान उन्होंने जिस तरह मेरी मदद की थी, वह मैं कभी नहीं भूल सकती। इस फिल्म की टीम एक परिवार जैसी लगी और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

निखिल नंदा

सवाल: फिल्म ‘आखिरी सवाल’ का कॉन्सेप्ट आपके दिमाग में कैसे आया?
देखिए, इसके लिए हमें कहीं बाहर जाकर कुछ खोजने की जरूरत नहीं पड़ी। आज हमारे आसपास के माहौल में, खासकर सोशल मीडिया पर, ऐसे कई सवाल लगातार उठते रहते हैं जिनके अलग-अलग लोग अलग-अलग जवाब देते हैं। हमें लगा कि भारत जैसे महान देश के नागरिकों, खासकर युवाओं तक इन सवालों और उनके जवाबों को एक फिल्म के माध्यम से पहुंचाया जाए, ताकि वे इन मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी हो सके।

त्रिधा चौधरी

सवाल: फिल्म में आपका किरदार किस तरह कहानी को आगे बढ़ाता है?
मैं फिल्म में भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हूं। मेरा किरदार ‘सारा’ एक कॉलेज स्टूडेंट है, जो बहस, संवाद और सवालों के जरिए कहानी का हिस्सा बनती है।

यह फिल्म सिर्फ इतिहास नहीं दिखाती, बल्कि यह बताती है कि युवा किस तरह देश और समाज के सवालों को समझते हैं। शूटिंग के दौरान कई बार मैं खुद भूल जाती थी कि मैं एक कलाकार हूं। ऐसा लगता था जैसे मैं सच में किसी बहस का हिस्सा हूं और बहुत कुछ सीख रही हूं।

सवाल: क्या आपने असल जिंदगी में कभी किसी प्रदर्शन या विरोध में हिस्सा लिया है?
हां, कॉलेज के दिनों में मैं क्लास रिप्रेजेंटेटिव थी और कई गतिविधियों में हिस्सा लिया करती थी। कॉलेज जीवन सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि वहीं से विचारों का आदान-प्रदान, बहस और नई चीजें सीखने की शुरुआत होती है। वहां छात्र एक-दूसरे को समझते हैं, साथ मिलकर काम करते हैं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी महसूस करते हैं।

नमाशी चक्रवर्ती

सवाल: फिल्म में आपके और संजय दत्त के बीच के संवाद काफी प्रभावशाली लगे। तैयारी कैसी रही?
यह किरदार मेरे लिए काफी अलग था। मुझे शूटिंग से सिर्फ एक हफ्ते पहले पूरी स्क्रिप्ट मिली थी और उसमें लंबे-लंबे संवाद थे। मैं सेट पर पहुंचने से पहले काफी नर्वस था, लेकिन थिएटर के अनुभव ने मदद की। मेरा एक नियम है कि सेट पर पहुंचते ही मैं खुद को किरदार में बदल देता हूं। जब कैमरा ऑन होता था, तब मैं नमाशी नहीं, सिर्फ ‘विक्की’ होता था। उत्कर्ष सर ने बहुत दमदार लेखन किया है। यह फिल्म सिर्फ सवाल-जवाब नहीं लगती, बल्कि एक gripping drama की तरह आगे बढ़ती है।

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