Lust Stories 3 Review : कोंकणा से अदिति-सिद्धार्थ तक, रिश्तों और चाहत की अलग-अलग दास्तान

Edited By Updated: 18 Sep, 2026 03:57 PM

lust stories 3 review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म लस्ट स्टोरीज 3

फिल्म- लस्ट स्टोरीज 3 (Lust Stories 3)
स्टाराकस्ट- कोंकणा सेन शर्मा (Konkona Sen Sharma), अदिति राव हैदरी (Aditi Rao Hydari), राधिका आप्टे (Radhika Apte), राधिका मदान (Radhika Madan), सना थंपी (Sana Thampi), सिद्धार्थ (Siddharth), अली फजल (Ali Fazal), विजय वर्मा (Vijay Varma), अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee), गुरफतेह पीरजादा (Gurfateh Pirzada), गजराज राव (Gajraj Rao)
डायरेक्टर- विक्रमादित्य मोटवाने (Vikramaditya Motwane), किरण राव (Kiran Rao) ,शकुन बत्रा (Shakun Batra), विशाल भारद्वाज (Vishal Bhardwaj)
प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स (Netflix)
रेटिंग- 3*

 

Lust Stories 3: समाज में आज भी महिलाओं की इच्छाओं, शारीरिक जरूरतों और रिश्तों में उनकी भावनात्मक अपेक्षाओं पर खुलकर बात नहीं होती। ‘लस्ट स्टोरीज’ फ्रेंचाइजी इसी चुप्पी को पर्दे पर लाने के लिए जानी जाती है। अब ‘लस्ट स्टोरीज 3’ प्यार, शादी, आकर्षण और रिश्तों की जटिलताओं को चार अलग-अलग कहानियों के जरिए सामने रखती है। इस बार फिल्म की कमान विक्रमादित्य मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज जैसे चार मंझे हुए निर्देशकों के हाथ में है। तो चलिए जानते हैं कैसी है फिल्म लस्ट स्टोरीज 3...

कहानी
पहली कहानी विक्रमादित्य मोटवाने की है जिसमें दो शादीशुदा सहेलियां शोना (कोंकणा सेन शर्मा) और पद्मा उर्फ पैडी (राधिका आप्टे) अपनी वैवाहिक जिंदगी में भावनात्मक दूरी और शारीरिक असंतुष्टि महसूस करती हैं। खंडाला ट्रिप के दौरान दोनों अपने पतियों (अभिषेक बनर्जी और विजय वर्मा) की अदला-बदली का एक अजीब खेल रचती हैं। दूसरी कहानी किरण राव की है जिसमें डिलीवरी बॉय करण (गुरफतेह पीरजादा) और नेल आर्टिस्ट लीसा (सना थंपी) के बीच अचानक पैदा हुआ आकर्षण कई अप्रत्याशित मोड़ लेकर आता है। गुरफतेह का डबल रोल कहानी में दिलचस्पी और तनाव दोनों बढ़ाता है।

तीसरी कहानी शकुन बत्रा की है, जहां वरुण (अली फजल) और सायली (राधिका मदान) शादी के दो साल बाद तलाक की कगार पर पहुंच चुके हैं। दोनों के बीच बातचीत और समझ लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन उनका शारीरिक जुड़ाव अब भी उन्हें एक-दूसरे से बांधे रखता है। थेरेपी के दौरान यही सवाल सामने आता है कि क्या यह आकर्षण रिश्ते के दर्द का इलाज है या महज कुछ पलों की राहत। आखिरी कहानी विशाल भारद्वाज की है, जो 80 के दशक के हैदराबाद में ले जाती है। यहां पीएचडी स्कॉलर सायरा (अदिति राव हैदरी) अपने शौहर बदरू (सिद्धार्थ) के साथ रहते हुए अपनी दबाई हुई इच्छाओं को किताबों और कल्पनाओं की दुनिया में तलाशती है। मंटो पढ़ने वाली सायरा धीरे-धीरे अपनी कल्पनाओं को एक अलग पहचान देने लगती है।

एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो चारों कहानियों में कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को अलग रंग दिया है। कोंकणा सेन शर्मा अपनी सहज और स्वाभाविक अदाकारी से एक बार फिर प्रभावित करती हैं, वहीं राधिका आप्टे ने अपने कॉमिक टाइमिंग और एक्सप्रेशंस से पहले हिस्से को हल्का-फुल्का बनाए रखा है। विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी भी अपने अपने किरदारों में जचे हैं। किरण राव की कहानी में गुरफतेह पीरजादा ने डबल रोल में अच्छा काम किया है और सना थंपी ने भी आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभाई है। अली फजल और राधिका मदान तीसरी कहानी की सबसे बड़ी ताकत हैं। दोनों ने गुस्से, प्यार, असुरक्षा और रिश्ते के टूटने की बेचैनी को काफी स्वाभाविक तरीके से पर्दे पर उतारा है। वहीं अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ की जोड़ी आखिरी कहानी में खास आकर्षण पैदा करती है। अदिति ने सायरा के दबे हुए अरमानों, शरारत और भावनात्मक उलझन को खूबसूरती से निभाया है, जबकि सिद्धार्थ ने बदरू के किरदार में एक अलग तरह की सहजता और आकर्षण दिखाया है। 

डायरेक्शन
‘लस्ट स्टोरीज 3’ में चारों निर्देशकों का अलग अंदाज साफ नजर आता है। विक्रमादित्य मोटवाने महिलाओं की इच्छाओं और वैवाहिक अकेलेपन को दिखाते हैं, लेकिन उनकी कहानी शुरुआत के बाद अपनी पकड़ खो देती है। किरण राव की कहानी हल्के-फुल्के अंदाज और ट्विस्ट के साथ मनोरंजन करती है, हालांकि ज्यादा गहरी छाप नहीं छोड़ती। शकुन बत्रा रिश्तों की जटिलता, इंटीमेसी और बातचीत की कमी को परिपक्वता से पेश करते हैं। वहीं विशाल भारद्वाज 80 के दशक के हैदराबाद, साहित्य और कल्पना के जरिए महिला इच्छाओं को बेहद खूबसूरत और शायराना अंदाज में दिखाते हैं। 

 

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