Rahu Ketu Review: कॉमिक टाइमिंग और सामाजिक व्यंग्य के साथ ‘राहू केतु’ ने बनाया अलग अनुभव

Updated: 16 Jan, 2026 03:34 PM

rahu ketu review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म राहु केतू

फिल्म: राहु केतु (Rahu Ketu)
कलाकार:पुलकित सम्राट (Pulkit Samrat), वरुण शर्मा (Varun Sharma), चंकी पांडे (Chunky Pandey), शालिनी पांडे (Shalini Pandey), पीयूष मिश्रा (Piyush Mishra), अमित सियाल (Amit Sial), सुमित गुलाटी (Sumit Gulati)
निर्देशन: विपुल विग (Vipul Vig)
रेटिंग: 3*


Rahu Ketu: पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा जब भी किसी फिल्म में साथ नजर आए हैं तो दर्शकों को हंसी से लोट पोट जरुर किया है। इन दोनों की जोड़ी दर्शकों को कॉमेडी की गारंटी देती है ये बात तो अब बिल्कुल पक्की हो चुकी है दोनों एक्टर की नई फिल्म राहू केतू से। विपुल विज के निर्देशन में बनी फिल्म राहू केतू 16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। आइए जानते है कैसी है पुलकित और वरुण की नई फिल्म।

कहानी
फिल्म की कहानी मज़ेदार, अलग और कल्पनाशील है। यह प्राचीन कथाओं, मान्यताओं और आधुनिक हास्य का अनोखा मिश्रण है, जिसे कॉस्मिक कॉमेडी कहा जा सकता है। कहानी की शुरुआत हिमाचल के एक गांव से होती है, जहां एक रहस्यमयी जादुई किताब है जिसमें लिखा हर शब्द सच हो जाता है। इस किताब के जरिए दो काल्पनिक किरदार, राहु और केतु, असल दुनिया में आ जाते हैं और भ्रष्टाचारियों पर अपना असर दिखाने लगते हैं। कहानी आगे बढ़ते हुए भ्रष्टाचार, आस्था और मानवीय लालच पर तंज कसती है। जब तक सब कुछ कंट्रोल में लगता है, तभी किताब का चोरी हो जाना पूरे खेल को पलट देता है। इसके बाद घटनाएं अराजक, हास्यपूर्ण और ड्रामेटिक मोड़ लेती हैं, जो दर्शकों को लगातार बांधे रखती हैं। कॉमेडी के साथ-साथ फिल्म समाज पर भी हल्का-फुल्का कटाक्ष करती है।

अभिनय
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी दमदार परफॉर्मेंस हैं। पुलकित सम्राट पूरी तरह परफेक्ट साबित होते हैं। उनका स्टाइल, स्वैग, सिक्स-पैक अपील और सहज अभिनय स्क्रीन पर प्रभाव छोड़ता है। कॉमेडी हो या इमोशनल सीन, पुलकित हर रंग में फिट बैठते हैं। वरुण शर्मा हमेशा की तरह अपने एलिमेंट में हैं। उन्हें देखते ही हंसी आना तय है। उनकी कॉमिक टाइमिंग जबरदस्त है और पुलकित के साथ उनकी केमिस्ट्री किसी हीरो-हीरोइन से कम नहीं लगती। खास बात यह है कि फिल्म में एक ऐसा सीन भी आता है, जहां ये दोनों सिर्फ हंसाते नहीं बल्कि भावुक भी कर देते हैं। शालिनी पांडे फिल्म में ताजगी लेकर आती हैं। उनका किरदार कहानी को संतुलन देता है और उन्होंने अपनी एक्टिंग से अच्छा प्रभाव छोड़ा है। पीयूष मिश्रा को देखना और सुनना अपने आप में अनुभव है उनकी आवाज़, संवाद अदायगी और मौजूदगी कहानी को गहराई देती है। अमित सियाल अपने छोटे लेकिन असरदार रोल में पूरी महफिल लूट लेते हैं, जबकि चंकी पांडे नेगेटिव रोल में सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। मनु ऋषि चड्ढा और सुमित गुलाटी ने भी अपने-अपने हिस्से को मजबूती से निभाया है।

निर्देशन
निर्देशक ने एक कठिन और कल्पनात्मक कॉन्सेप्ट को मनोरंजक अंदाज में पेश किया है। कठपुतली, एनिमेशन और पीयूष मिश्रा की आवाज़ में गाया गया टाइटल सॉन्ग शुरुआत से ही दर्शकों को फिल्म की दुनिया में खींच लेता है। निर्देशन की खास बात यह है कि फिल्म उपदेशात्मक हुए बिना अपनी बात कहती है। हास्य, फैंटेसी और सामाजिक व्यंग्य के बीच संतुलन बनाए रखा गया है।



कुल मिलाकर, यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो कुछ नया, मज़ेदार और सोचने पर मजबूर करने वाली कॉमेडी देखना चाहते हैं जहां हंसी के साथ-साथ कहानी भी दमदार हो।

IPL
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