Edited By Mansi,Updated: 06 Mar, 2026 12:09 PM
फिल्म: सूबेदार (Subedaar)
कलाकार: अनिल कपूर (Anil Kapoor) , राधिका मदान (Radhika Madan) , सौरभ शुक्ला (Saurabh Shukla), आदित्य रावल (Aditya Rawal) , मोना सिंह (Mona Singh) , फैसल मलिक (Faisal Malik) और खुशबू सुंदर (Khushboo Sundar)
निर्देशक: सुरेश त्रिवेणी (Suresh Triveni)
रेटिंग: 3 स्टार
Subedaar: सूबेदार के जरिए एक बार फिर Amazon Prime Video ने अपने दर्शकों के सामने एक बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म पेश की है। फिल्म में मुख्य भूमिका में अनिल कपूर नजर आते हैं, जो एक रिटायर्ड सेना अधिकारी के किरदार में दिखाई देते हैं। उनके साथ फिल्म में राधिका मदान, मोना सिंह, आदित्य रावल, सौरभ शुक्ला और फैसल मलिक भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म एक ऐसे पूर्व सैनिक की कहानी दिखाती है, जो रिटायरमेंट के बाद अपने परिवार और सम्मान की रक्षा के लिए अपराध और भ्रष्टाचार से भरे माहौल का सामना करता है। आइए जानते हैं कैसी है अनिल कपूर की फिल्म सूबेदार।
कहानी
फिल्म की कहानी सूबेदार अर्जुन मौर्य (Anil Kapoor) के जीवन पर केंद्रित है। अर्जुन ने अपना ज्यादातर जीवन देश की सेवा में सरहद पर बिताया है। रिटायरमेंट के बाद वह अपनी बेटी श्यामा (Radhika Madan) के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी (Khushbu Sundar) की एक हादसे में मौत हो चुकी है, और बेटी को इस बात का मलाल है कि उस मुश्किल समय में उसके पिता उसके साथ नहीं थे।
जिस शहर में अर्जुन रहते हैं, वहां अपराध जगत पर बबली दीदी (Mona Singh) का दबदबा है। बबली रेत के अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क चलाती है। उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों का अंजाम अक्सर बुरा होता है। हालांकि वह खुद जेल में बंद है, लेकिन उसका भाई प्रिंस (Aditya Rawal) बाहर पूरे इलाके में अपना आतंक बनाए रखता है और उसके कामकाज को सॉफ्टी भैया (Faisal Malik) संभालते हैं।
अर्जुन के पुराने दोस्त प्रभाकर (Saurabh Shukla) उन्हें प्रिंस के ड्राइवर की नौकरी दिलवा देते हैं। इसके बाद अर्जुन का सामना धीरे-धीरे उस अपराध जगत से होता है, जहां भ्रष्टाचार, हिंसा और सत्ता का खेल चलता है। परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि एक रिटायर्ड सैनिक को अपने सम्मान, अपनी बेटी और अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए इन ताकतों से भिड़ना पड़ता है।
निर्देशन
फिल्म का निर्देशन उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं बन पाता। कहानी में संभावनाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन उसे प्रस्तुत करने का तरीका काफी धीमा और लंबा महसूस होता है। लगभग ढाई घंटे की अवधि में कई ऐसे दृश्य हैं जो फिल्म की गति को कमजोर कर देते हैं।

विलेन को खतरनाक दिखाने की कोशिश जरूर की गई है, लेकिन उनके किरदारों में वह असर पैदा नहीं हो पाता जिससे दर्शक असली खतरे का एहसास कर सकें। फिल्म का माहौल भी उतना रोमांचक नहीं बन पाता जितनी इसकी कहानी मांग करती है।
अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट का अभिनय है। अनिल कपूर अपने किरदार में दमदार नजर आते हैं। उनका गुस्सा, संयम और एक सैनिक की दृढ़ता को उन्होंने प्रभावशाली तरीके से पेश किया है।
विलेन प्रिंस के रूप में आदित्य रावल प्रभाव छोड़ते हैं और अपने किरदार को अच्छी तरह निभाते हैं। राधिका मदान ने भी बेटी के भावनात्मक पहलू को ईमानदारी से दिखाया है।
बबली दीदी के किरदार में मोना सिंह की मौजूदगी प्रभावशाली है, हालांकि उनके चरित्र को और विस्तार दिया जा सकता था।
सपोर्टिंग कास्ट में सौरभ शुक्ला और फैजल मलिक अपने-अपने किरदारों में मजबूत नजर आते हैं। खुशबू सुंदर की छोटी भूमिका भी कहानी में अलग ताजगी लाती है। फिल्म में नाना पाटेकर की कैमियो एंट्री दर्शकों को चौंकाने का काम करती है।