Edited By Pardeep,Updated: 12 Mar, 2026 09:55 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच अहम कूटनीतिक बातचीत हुई है। इस बातचीत में खास तौर पर समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। सरकार की ओर से गुरुवार को इसकी जानकारी दी गई।
इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच अहम कूटनीतिक बातचीत हुई है। इस बातचीत में खास तौर पर समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। सरकार की ओर से गुरुवार को इसकी जानकारी दी गई।
विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हो चुकी है। इन वार्ताओं में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, सुरक्षा चुनौतियों और भारत से जुड़े हितों पर चर्चा की गई।
ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग मार्गों पर फोकस
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवालने बताया कि हालिया बातचीत में खास तौर पर समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस वार्ता के बारे में अभी अधिक जानकारी देना जल्दबाजी होगी, लेकिन भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग रूट की सुरक्षा बेहद अहम हो गई है।
पीएम मोदी ने भी की खाड़ी देशों के नेताओं से बात
इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते संकट को देखते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। सरकार ने कहा कि भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बहाल करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा पर नजर
सरकार के अनुसार इस समय ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। इनमें छात्र, नाविक, कारोबारी, पेशेवर और तीर्थयात्री शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि तेहरान से कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं, उनकी मदद अज़रबैजान और आर्मीनिया के रास्ते बाहर निकलने में की जा रही है, ताकि वे वहां से फ्लाइट लेकर भारत लौट सकें। सरकार का कहना है कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।