Review: भारी भरकम ड्रामा नहीं, सादगी और भावनाओं से दिल जीतती है 'कृष्णा और चिट्ठी'

Edited By Updated: 28 May, 2026 03:43 PM

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यहां पढ़ें कैसी है फिल्म कृष्णा और चिट्ठी...

फिल्म: कृष्णा और चिट्ठी (Krishna Aur Chitthi)
कलाकार: अरुण गोविल (Arun Govil), दर्शील सफारी (Darsheel Safary), सज्जाद डेलाफ्रूज़ (Sajjad Delafrooz), मीर सरवर (Mir Sarwar), फैज़ खान (Faiz Khan) और विनय भारद्वाज (Vinay Bhardwaj)
निर्देशक: विनय भारद्वाज (Vinay Bhardwaj ) और सौमित्र सिंह (Saumitra Singh)
प्रोड्यूसर: रवीना ठाकुर (Raveena Thakur) और विनय भारद्वाज (Vinay Bhardwaj)
रेटिंग: 3.5*

Krishna Aur Chitthi: कई बार कुछ फिल्में बिना ज्यादा शोर-शराबे के दर्शकों के दिल में खास जगह बना लेती हैं। ‘कृष्णा और चिट्ठी’ भी ऐसी ही एक फिल्म है, जो बड़े ट्विस्ट्स और भारी ड्रामे के बजाय रिश्तों, भावनाओं और इंसानी संवेदनाओं की सच्चाई को बेहद शांत तरीके से पेश करती है। फिल्म थिएटर से निकलने के बाद भी लंबे समय तक अपने एहसास दर्शकों के साथ छोड़ जाती है।

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कहानी
फिल्म की कहानी अर्जुन (दर्शील सफारी) और उसके पिता (अरुण गोविल) के इर्द-गिर्द घूमती है। अर्जुन को एक जमीन बचाने के लिए क्रिकेट मैच खेलना पड़ता है, लेकिन उसे खुद पर भरोसा नहीं होता कि वह यह मैच जीत पाएगा। ऐसे में वह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को एक चिट्ठी लिखता है। कहानी आगे बढ़ते हुए रिश्तों की अहमियत, बदलते वक्त और अधूरी भावनाओं जैसे कई सवालों को बेहद भावुक अंदाज में सामने रखती है। फिल्म धीरे-धीरे अपने किरदारों और उनकी भावनाओं को दर्शकों से जोड़ती है।

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एक्टिंग
फिल्म में अरुण गोविल का अभिनय इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। उन्होंने अपने किरदार को सादगी और गहराई के साथ निभाया है। वहीं दर्शील सफारी एक बार फिर साबित करते हैं कि इमोशनल किरदारों में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। उनकी मासूमियत और आंखों में दिखने वाली बेचैनी कई दृश्यों को खास बना देती है। सज्जाद डेलाफ्रूज़ और मीर सरवर ने भी अपने किरदारों के जरिए कहानी को मजबूती दी है।

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डायरेक्शन
निर्देशक विनय भारद्वाज और सौमित्र सिंह ने फिल्म को बेहद संवेदनशील और शांत अंदाज में पेश किया है। फिल्म कहीं भी जल्दबाजी नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाती है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर इसकी भावनात्मक गहराई को और मजबूत बनाते हैं। सिनेमैटोग्राफी भी खासतौर पर इमोशनल दृश्यों में काफी प्रभावशाली है। हालांकि कुछ दर्शकों को इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन जो लोग दिल को छू लेने वाली कहानियां पसंद करते हैं, उनके लिए ‘कृष्णा और चिट्ठी’ एक खूबसूरत अनुभव साबित हो सकती है।
 

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