Edited By Manisha,Updated: 22 Jul, 2026 02:52 PM

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म मैक्स मिन म्याउजाकी
फिल्म- मैक्स मिन म्याउजाकी (Max, Min and Meowzaki)
स्टारकास्ट- सिद्धार्थ मेनन (Siddharth Menon), मेधा शंकर (Medha Shankar), आदिल हुसैन (Adil Hussain), मंदिरा बेदी (Mandira Bedi), नासर (Nassar), नफीसा अली (Nafisa Ali), विधात्री बंदी (Vidhatri Bandi) और गीतांजलि राव (Gitanjali Rao)
डायरेक्शन- पद्मकुमार नरसिम्हमूर्ति (Padmakumar Narasimhamurthy)
रेटिंग- 3.5*
Max, Min and Meowzaki: आज के दौर में जहां ज्यादातर फिल्में बड़े ट्विस्ट और हाई-ऑक्टेन ड्रामा पर जोर देती हैं, वहीं 'मैक्स मिन म्याउजाकी' एक ऐसी फिल्म है जो अपनी सादगी, भावनात्मक गहराई और रिश्तों की खूबसूरत परतों के दम पर दर्शकों का दिल जीत लेती है। निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति ने इस फिल्म के जरिए प्यार, बिछड़ने का दर्द, अकेलापन, पारिवारिक रिश्ते जैसे विषयों को बेहद संवेदनशील और सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। तो चलिए जानते हैं कैसी है फिल्म...

कहानी
फिल्म की शुरुआत मैक्स (सिद्धार्थ मेनन) और उसकी फिल्ममेकर गर्लफ्रेंड मिन (मेधा शंकर) के अलग होने से होती है। दोनों के रिश्ते का अंत हो चुका है लेकिन उनके बीच एक सवाल बाकी है उनकी प्यारी बिल्ली 'म्याउजाकी' की कस्टडी किसे मिलेगी? इसी बीच मैक्स अपनी मां वसुधा के निधन के गम से जूझ रहा है, जबकि उसके पिता रमेश अकेलेपन और अनिद्रा से लड़ते हुए थेरेपिस्ट धारा के साथ एक नई भावनात्मक शुरुआत करते हैं। दूसरी ओर नर्सिंग होम में रह रहे मैक्स के दादा श्रीधर की जिंदगी में जेनिफर सिक्वेरा की दोस्ती नई खुशियां लेकर आती है। वहीं कैट-सिटर कैरल भी मैक्स की जिंदगी में अहम भूमिका निभाती है और उसे भावनात्मक रूप से संभालने में मदद करती है। फिल्म बिना किसी बनावटीपन के दिखाती है कि हीलिंग तब शुरू होती है, जब इंसान अपने जज़्बातों को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीखता है।

एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी शानदार स्टारकास्ट और उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस है। सिद्धार्थ मेनन ने मैक्स के किरदार में टूटन, दर्द और उम्मीद को बेहद सहजता से निभाया है। आदिल हुसैन एक ऐसे पिता के किरदार में कमाल करते हैं। मंदिरा बेदी ने धारा के रूप में सादगी, संवेदनशीलता और आत्मीयता का खूबसूरत मेल पेश किया है। नफीसा अली अपनी चुलबुली मौजूदगी से हर सीन में गर्मजोशी भर देती हैं। वहीं मेधा शंकर, नासर, विदात्री बांदी और गीतांजलि राव ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। खास बात यह है कि फिल्म की सबसे प्यारी मौजूदगी म्याउजाकी भी है, जो बिना कुछ कहे कई भावनाएं दर्शकों तक पहुंचा देती है।

डायरेक्शन
निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति ने एक साधारण कहानी को बेहद खूबसूरत और भावनात्मक पारिवारिक ड्रामा में बदल दिया है। उन्होंने तीन पीढ़ियों के पुरुषों के जरिए दुख, अकेलेपन, पितृसत्ता, गलत परवरिश और भावनात्मक घावों जैसे विषयों को बिना किसी उपदेशात्मक अंदाज के बेहद संवेदनशीलता के साथ पेश किया है। कुल मिलकार यह फिल्म अपने परिवार के साथ देख सकते हैं।