Do Deewane Seher Mein Review: मेट्रो सिटी की भागदौड़ में खुद को खोजती एक इमोशनल लव स्टोरी

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 03:10 PM

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यहां पढ़ें कैसी है फिल्म दो दीवाने सहर में

फिल्म: दो दीवाने सहर में (Do Deewane Seher Mein)
कलाकार: सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi), मृणाल ठाकुर (Mrunal Thakur),इला अरुण (Ila Arun), जॉय सेनगुप्ता (Joy Sengupta) और अन्य
निर्देशक: रवि उदयवार (Ravi Udayawar)
रेटिंग: 3.5*


Do Deewane Seher Mein: 
रवि उदयवार की डायरेक्शन में बनी ‘दो दीवाने शहर में’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर स्टारर यह एक सेंसिटिव और इमोशनल रोमांटिक फिल्म है, जो मेट्रोपोलिस की तेज रफ्तार जिंदगी और कॉर्पोरेट संस्कृति के बीच युवा प्रेमियों की असुरक्षाओं और चुनौतियों को सामने लाती है। ट्रेलर के बाद से ही फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है अब जब फिल्म रिलीज हो चुकी है आइए जानते हैं कैसी है फिल्म दो दीवाने सहर में

कहानी
फिल्म के कहानी शशांक शर्मा (सिद्धांत चतुर्वेदी) और रोशनी श्रीवास्तव (मृणाल ठाकुर) के इर्द-गिर्द घूमती हैं। शशांक एक सफल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल है, जिसके पास करियर और पैसा तो है, लेकिन हकलाने की समस्या उसे अंदर से असुरक्षित बनाती है। रोशनी एक मीडिया एजेंसी में काम करती है, इंडिपेंडेंट और मॉडर्न है, लेकिन अपनी बॉडी इमेज और लुक्स को लेकर गहरी चिंता में रहती है।

दोनों के बीच रिश्ते का कॉन्फ्लिक्ट बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि उनके अंदर से शुरू होता है। परिवार की शादी की उम्मीदों और शहर की भागदौड़ के बीच, यह जोड़ी अपने डर और कमियों के साथ लड़ते हुए धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आती है। अब क्या ये जोड़ी एक दूसरे को समझ पाएगी क्या इनका रिश्ता एक-दूसरे को समझेगा ये जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी।

एक्टिंग
सिद्धांत चतुर्वेदी ने शशांक के किरदार को बेहद संवेदनशील और रियल तरीके से पेश किया है। उनके हकलाने और बॉडी लैंग्वेज ने किरदार की कमजोरियों को ओवरएक्टिंग के बिना रियल दिखाया। मृणाल ठाकुर रोशनी के किरदार में फिल्म की इमोशनल स्ट्रेंथ हैं। उनकी आंखों की भावभंगिमा और साइलेंट मोमेंट्स दर्शकों को सीधे किरदार के अंदर ले जाती हैं।
संदीपा धर सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ती हैं, जबकि इला अरुण अपनी मौजूदगी से कहानी में अपना अनुभव जोड़ती हैं।

डायरेक्शन 
रवि उदयवार ने कहानी को सहज और संवेदनशील तरीके से पेश किया है। फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर किरदारों की भावनाओं के साथ मेल खाते हैं और कहानी में गहराई जोड़ते हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी उत्तराखंड की घाटियों और मुंबई की तेज-तर्रार जिंदगी के बीच संतुलन बनाए रखती है। कहानी का संदेश युवा दर्शकों के लिए प्रेरणादायक है। फिल्म की धीमी रफ्तार दूसरे हाफ में थोड़ी बोझिल लगती है। कुछ इमोशनल सीन दोहराए गए हैं, जिससे कहानी में नयापन कम हो जाता है।

दो दीवाने शहर में एक गहरी, संवेदनशील और रियलिस्टिक रोमांटिक फिल्म है। अगर आप सीरियस और इमोशनल लव स्टोरी पसंद करते हैं, तो यह फिल्म निश्चित रूप से देखने लायक है।

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