Edited By Manisha,Updated: 29 May, 2026 11:14 AM

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो
फिल्म- द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो (The Great Grand Superhero)
स्टारकास्ट- जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) , मिहिर गोडबोले (Mihir Godbole), शिवांश चोर्गे (Shivansh Chorge) , भाग्यश्री पटवर्धन (Bhagyashree Patwardhan) और प्रतीक स्मिता पाटिल (Prateik Smita Patil)
डायरेक्टर- मनीष सैनी (Manish Saini)
निर्माता- उमेश कुमार बंसल (Umesh Kumar Bansal) और मनीष सैनी (Manish Saini)
रेटिंग- 3*
The Great Grand Superhero: 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' एक ऐसी फिल्म है जो बच्चों और बड़ों दोनों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का मौका देती है। यह कहानी एक छोटे स्कूलबॉय, दीपु (मिहिर गोडबोले), के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दादा को असली सुपरहीरो बताता है। जैकी श्रॉफ के रूप में दादा का किरदार सिर्फ हीरो नहीं बल्कि एक प्यारा और मिलनसार मेंटर भी है। फिल्म का उद्देश्य सरल है एक फैंटेसी एडवेंचर के जरिए बचपन की मासूमियत, दोस्ती और पारिवारिक भावनाओं को सामने लाना। दृश्य और वीएफएक्स का मेल, भावनाओं के साथ, कहानी को और भी आकर्षक बनाता है। तो चलिए जानते हैं कैसी है फिल्म...

कहानी
कहानी एक छोटे स्कूलबॉय, दीपु (मिहिर गोडबोले), के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दादा को असली सुपरहीरो बताता है। कहानी एक दिलचस्प ट्विस्ट के साथ शुरू होती है: दीपु नए स्कूल में एडमिशन लेता है और अपने दादा के सुपरहीरो होने की बात सबको बताता है। कुछ दोस्त मान जाते हैं, तो कुछ इसे उजागर करने की कोशिश करते हैं। दीपु के हिसाब से दादा का मिशन है दुनिया को एलियन्स से बचाना। लेकिन असली सवाल यह है क्या एलियन्स सच में हैं? और दादा असली सुपरहीरो हैं या सिर्फ दीपु की कल्पना का हिस्सा? यह तो आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा।

अभिनय
जैकी श्रॉफ ने अपनी गर्मजोशी और चार्म से दादा के रूप में स्क्रीन पर जादू कर दिया है। उनका हीरोइज़्म साधारण और वास्तविक है, सिर्फ मांसपेशियों या एक्शन से नहीं, बल्कि भावनात्मक गहराई से। मिहिर गोडबोले अपने दीपु के रोल में प्राकृतिक और आत्मविश्वासी लगते हैं और उनकी मासूमियत कहानी को इमोशनल रूप से मजबूत बनाती है। शिवांश चोर्गे लड्डू के रूप में कॉमिक रिलीफ का काम शानदार करते हैं। प्रतीक स्मिता पाटिल खलनायक के रूप में कथा को सही ढंग से समर्थन देते हैं। भाग्यश्री का कैमियो कहानी में एक प्यारा टच जोड़ता हैं।

निर्देशन और लेखन
मनीष सैनी जिन्होंने तीन बार नेशनल अवार्ड जीते हैं उन्होंने इस फिल्म में नई अप्रोच अपनाई है वीएफएक्स से ज्यादा भावनात्मक कहानी पर ध्यान दिया। लेखन और निर्देशन का मेल फिल्म को बच्चों के लिए आकर्षक और बड़ों के लिए भी रिलेटेबल बनाता है। कुछ दृश्य थोड़े अनावश्यक लगते हैं और क्लाइमेक्स थोड़ा और अच्छा हो सकता था। लेकिन फिल्म की नियत और मौलिकता साफ है। आसान भाषा में कहा जाए तो डायरेक्शन अच्छा है और निर्देशक अपनी बात कहने में सफल रहे हैं। इस फिल्म को आप अपनी फैमिली के साथ देख सकते हैं।