Edited By Manisha,Updated: 24 Jun, 2026 03:08 PM
फिल्म को लेकर डायरेक्टर अहमद खान, एक्टर अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, आफताब शिवदासानी, जैकी श्रॉफ और एक्ट्रेस दिशा पटानी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है अहमद खान द्वारा डायरेक्टेड फिल्म वेलकम टू द जंगल। फिल्म में 30 से ज्यादा कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म को लेकर बज बना हुआ है और इसी फिल्म के जरिए रवीना टंडन फिर कमबैक कर रही हैं। फिल्म को लेकर डायरेक्टर अहमद खान, एक्टर अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, आफताब शिवदासानी, जैकी श्रॉफ और एक्ट्रेस दिशा पटानी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
अहमद खान
सवाल: फिल्म में 30 से ज्यादा कलाकार हैं। इतने बड़े कलाकारों के समूह को संभालने में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
जवाब: पंचलाइन की चिंता तो बिल्कुल नहीं थी, क्योंकि हमारे कलाकार अपनी-अपनी पंचलाइन लेकर आते थे। उन्हें सिर्फ बोलने का मौका देना होता था। असली चुनौती यह नहीं थी कि कौन परेशानी देगा, बल्कि यह थी कि सेट पर सब एक-दूसरे से इतने प्यार से मिलते थे कि ‘गुड मॉर्निंग’, ‘कैसे हो’, ‘क्या चल रहा है’ में ही आधा-पौना घंटा निकल जाता था।
जब शूटिंग शुरू होती थी, तब सबकी कॉमिक टाइमिंग देखने लायक होती थी। सेट पर करीब 32 कलाकार थे। हर कलाकार के साथ तीन-चार स्टाफ सदस्य होते थे। फिर हमारी यूनिट थी, फाइटर्स थे, डांसर्स थे, जूनियर आर्टिस्ट थे। रोजाना लगभग 800-900 लोग सेट पर मौजूद रहते थे। एक और मजेदार दिक्कत थी इतने बड़े सेट के साथ लगभग 50 वैनिटी वैन खड़ी होती थीं। कभी-कभी लगता था कि वैनिटी वैन का इलाका सेट से भी बड़ा हो गया है।
अक्षय कुमार
सवाल: आपने अपने करियर में एक्शन, रोमांस और कई तरह की फिल्में की हैं, लेकिन दर्शक आपको सबसे ज्यादा कॉमेडी से जोड़ते हैं। ऐसा क्यों?
जवाब: ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैंने सिर्फ कॉमेडी की है। मैंने बहुत सारी एक्शन फिल्में की हैं, रोमांटिक फिल्में की हैं। ‘धड़कन’ जैसी फिल्म भी की है। लेकिन शायद कॉमेडी में जो किरदार लोगों के दिलों में बस जाते हैं, वे लंबे समय तक याद रहते हैं। यही वजह है कि लोग मुझे कॉमेडी से ज्यादा जोड़ते हैं।
सवाल: आपकी फिल्म ‘जान-ए-मन’ जैसी फिल्मों को आज की पीढ़ी बहुत पसंद करती है, जबकि रिलीज के समय उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली थी। क्या आपकी फिल्मोग्राफी में ऐसी और फिल्में हैं जिन्हें आप कम आंकी गई मानते हैं?
जवाब: मेरे हिसाब से ‘तीस मार खान’ और ‘खट्टा मीठा’ ऐसी फिल्में हैं जो मुझे बहुत पसंद थीं, लेकिन रिलीज के समय उतना नहीं चलीं। आज उनके मीम्स बनते हैं, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें खूब देखा जाता है। दर्शकों ने समय के साथ उन्हें नई पहचान दी है।
आफताब
सवाल: फिल्म में कोई ऐसा दृश्य था जिसे आपने पहले मुश्किल समझा हो लेकिन बाद में वह आसानी से हो गया?
जवाब: सच कहूं तो मुझे कोई भी सीन बहुत मुश्किल नहीं लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि फिल्म के लगभग सभी कलाकार पहले भी एक-दूसरे के साथ काम कर चुके थे। हमारे बीच पहले से ही अच्छी समझ थी। माहौल इतना सहज था कि हम हर दिन शूटिंग पर आने का इंतजार करते थे। ऐसा लगता था जैसे किसी बड़े परिवार के साथ समय बिता रहे हों।
अरशद वारसी
सवाल: आप और श्रेयस तलपड़े फिल्म में ऐसे किरदार निभा रहे हैं जिनकी तुलना लोग अनिल कपूर और नाना पाटेकर के आइकॉनिक किरदारों से करेंगे। क्या यह दबाव महसूस हुआ?
जवाब: नहीं, हमने कभी यह कोशिश नहीं की कि किसी की जगह भरें। अनिल कपूर और नाना पाटेकर शानदार कलाकार हैं और उनके किरदार आइकॉनिक हैं। हम सभी उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। सच कहूं तो मुझे तो यह अच्छा लगता अगर वे भी इस फिल्म का हिस्सा होते। हमने बस अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से काम किया है। उम्मीद है कि दर्शकों को हमारा काम पसंद आएगा।
सवाल: क्या कभी ऐसा हुआ है कि सेट का माहौल अच्छा न हो और उसका असर परफॉर्मेंस पर भी दिखे?
जवाब: बिल्कुल हुआ है। हर कलाकार के साथ कभी न कभी ऐसा होता है। हर इंसान आपकी पसंद का नहीं हो सकता। कई बार माहौल वैसा नहीं होता जैसा आप चाहते हैं, लेकिन अंत में यह आपका काम है। आपको अपना काम पूरी लगन से करना होता है। प्रोफेशनलिज्म यही है कि परिस्थितियां कैसी भी हों आप अपना बेस्ट दें।
सुनील शेट्टी
सवाल: 90 के दशक से लेकर आज तक इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव क्या देखते हैं?
जवाब: मुझे लगता है कि सबसे बड़ी कमी आपसी सहयोग और एकता की है। पहले पूरी इंडस्ट्री एक परिवार की तरह थी। किसी फिल्म का प्रीमियर होता था तो सभी लोग फिल्म देखने आते थे और उसे सेलिब्रेट करते थे। आज सोशल मीडिया और व्यूज़ के दौर में चीजें बदल गई हैं। लोग तस्वीरें खिंचवाने ज्यादा आते हैं फिल्म देखने कम। पहले कलाकार एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाते थे। आज वह भावना थोड़ी कम हो गई है। मुझे लगता है कि इंडस्ट्री को फिर से उसी एकजुटता की जरूरत है।
दिशा पटानी
सवाल: यह आपकी पहली पूरी तरह कॉमेडी फिल्म है। इतने अनुभवी कॉमेडी कलाकारों के बीच काम करते समय आपका सहारा कौन था?
जवाब: सबसे बड़ा सहारा तो अहमद सर थे। लेकिन सच कहूं तो पूरी टीम बहुत सपोर्टिव थी। हम सभी एक छोटे परिवार की तरह बन गए थे। कॉमेडी में कभी भी कुछ भी हो सकता है, इसलिए आपको हर समय तैयार रहना पड़ता है। कोई न कोई हमेशा सीन को संभाल लेता था। खासकर अरशद सर अक्सर कुछ ऐसा बोल देते थे जिससे माहौल और मजेदार हो जाता था।
सवाल: ‘वेलकम’ के पुराने गाने आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। क्या आपने उन गानों को दोबारा देखा या उनसे प्रेरणा ली?
जवाब: मैं हमेशा से उन गानों की फैन रही हूं। शूटिंग के दौरान भी मैं अक्सर ‘वेलकम’ के गाने गुनगुनाती रहती थी और उनके स्टेप्स करती रहती थी। जब फिल्म में उस गाने का हिस्सा बनने का मौका मिला तो लगा जैसे कोई सपना पूरा हो गया हो।
जैकी श्रॉफ
सवाल: क्या शूटिंग के दौरान सच में ऐसा लगा कि एक परिवार बन गया है?
जवाब: बिल्कुल। पहले तो मैं सिर्फ फिल्म का नाम सुनकर ही तैयार हो गया था। फिर अहमद खान के साथ मेरा पुराना रिश्ता है। बाकी पूरी गैंग भी अपनी ही थी। पहले दिन सेट पर पहुंचा तो ऐसा लगा जैसे घर आ गया हूं। मैं उम्र में इनसे बड़ा हूं लेकिन सबने मेरा ख्याल बच्चे की तरह रखा। हमने बहुत मज़े किए। इतने शानदार कलाकारों के बीच मुझे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। सब लोग अपना कमाल दिखा रहे थे और मैं उसका आनंद ले रहा था।
सवाल: अगर आपको 80-90 के दशक की फिल्म इंडस्ट्री की कोई एक चीज वापस लाने का मौका मिले, तो वह क्या होगी?
जवाब: मैं बड़े सिंगल-स्क्रीन थिएटर वापस लाना चाहूंगा। मराठा मंदिर, चंदन, रूपम, डायना, अप्सरा जैसे सिनेमाघरों का अपना अलग ही जादू था। वहां फिल्म देखना एक अनुभव होता था। आज मल्टीप्लेक्स का दौर है लेकिन उन बड़े थिएटरों की बात ही कुछ और थी।