नेपाल की बाढ़ के बीच चीन के मेगा डैम पर सवाल: क्या हिमालय का यह प्रोजेक्ट बन सकता है 'वॉटर बम'?

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 11:07 PM

amid nepal floods china s mega dam raises questions

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और सैलाब के कारण नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है और कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इस भयानक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं।

इंटरनेशनल डेस्कः नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और सैलाब के कारण नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है और कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इस भयानक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में इंसानी दखल और प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चीन की नादानी बनेगी भारत के लिए 'वॉटर बम'
इस तबाही के बाद भू-राजनीतिक विश्लेषक और 'वाटर: एशियाज न्यू बैटलग्राउंड' के लेखक डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने चीन के खतरनाक मंसूबों पर दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि हिमालय दुनिया का सबसे संवेदनशील और भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां विनाशकारी भूकंप आने का पुराना इतिहास रहा है। ऐसे नाजुक इलाके में, भारत-तिब्बत सीमा के करीब चीन द्वारा बनाया जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा बांध पूरे पूर्वोत्तर भारत (North-East) और बांग्लादेश के लिए एक 'वॉटर बम' साबित होने वाला है।

सक्रिय फॉल्ट लाइन पर अरबों लीटर पानी का कृत्रिम दबाव
'सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' जर्नल में चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और चाइना जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित एक हालिया अध्ययन इस खतरे की पुष्टि करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब चीन इस बांध में अरबों लीटर पानी जमा करेगा, तो पानी के लंबे समय तक रिसाव और भारी दबाव के कारण नाजुक पहाड़ों की ढलानें अचानक दरक सकती हैं। मामूली भूकंपीय हलचल भी यहां विशालकाय भूस्खलन और भीषण तबाही ला सकती है।

यह बांध जिस पाईझेन फॉल्ट लाइन के पास बन रहा है, वह हिमयुग (प्लीस्टोसिन काल) से सक्रिय है और लगभग 9,500 साल पहले भी इसमें बड़ी हलचल देखी गई थी। साल 2017 में तिब्बत के मिलिन में आया 6.9 तीव्रता का भीषण भूकंप भी इसी फॉल्ट लाइन के उत्तरी छोर पर आया था। यहां की चट्टानों की बनावट काफी कमजोर और दरारों से भरी है, जो कभी भी बड़े भूकंप से दहल सकती है।

पूरे दक्षिण एशिया के लिए 'टिकिंग टाइम बम'
विदेश मामलों के जानकार रॉबिन्द्र सचदेव के अनुसार, चीन अपनी आर्थिक और तकनीकी ताकत के घमंड में तमाम भूगर्भीय चेतावनियों की अनदेखी कर रहा है। धरती के इस संवेदनशील हिस्से में पहले से ही कई बांध बने हैं और इतने भारी ढांचे के साथ अरबों टन पानी का कृत्रिम दबाव बनाना सीधे तौर पर विनाश को आमंत्रण देना है। यदि भविष्य में कोई बड़ा भूकंप आता है और यह बांध क्षतिग्रस्त होता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश में ऐसा भयानक जलजला आएगा जिसकी भरपाई करना नामुमकिन होगा। यह पूरा प्रोजेक्ट दक्षिण एशिया के लिए एक 'टिकिंग टाइम बम' बन चुका है।

अपनों की ही चेतावनी ठुकरा रहा है चीन
हैरानी की बात यह है कि खुद चीन की सरकारी संस्थाओं से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपनी ही सरकार और इंजीनियरों को आगाह किया है कि केवल बांध बना देना काफी नहीं होगा। उन्होंने निर्माण के दौरान कमजोर ढलानों को मजबूत करने और चट्टानों को खिसकने से रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की सलाह दी थी, लेकिन चीनी सरकार इन सुरक्षा चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।

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