Edited By Sanjeev,Updated: 13 Sep, 2026 09:29 AM

सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल पाइपलाइन पर हमले के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच इराक ने कहा है कि ये हमले उसके क्षेत्र से किए गए थे। इराक सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ईरान की सीमा से...
बगदाद : सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल पाइपलाइन पर हमले के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच इराक ने कहा है कि ये हमले उसके क्षेत्र से किए गए थे। इराक सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ईरान की सीमा से लगे मैसान प्रांत की अभियान कमान की जांच के आदेश दिए और उसके कमांडर को पद से हटा दिया। अधिकारियों ने जांच में पाया कि सऊदी पाइपलाइन पर हमले इसी प्रांत से किए गए थे।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने हमलों के लिए इराक से आए ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को 'आवश्यक कदम उठाने का अवसर' मिल सके। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से पोतों की आवाजाही बाधित होने के बाद से 'ईस्ट-वेस्ट' पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार पाइपलाइन के अंतिम छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह से सऊदी अरब का तेल निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है।
क्षेत्रीय अधिकारियों ने एपी (एसोसिएटेड प्रेस) को बताया है कि हूतियों और इराकी मिलिशिया ने आपसी समन्वय से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले किए। पाइपलाइन पर हमले के बाद ट्रंप ने इसके पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई। जब ट्रंप से पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या उन्हें लगता है कि 'ईस्ट-वेस्ट' पाइपलाइन पर हमले के पीछे ईरान था, उन्होंने कहा, 'हां, मुझे लगता है कि वही है। शायद वही है।'
ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने हूतियों के साथ 'बातचीत की है' लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बातचीत कब हुई। उन्होंने कहा, 'हूतियों ने हमें फोन किया और वे हमसे लड़ना नहीं चाहते। वे यही चाहेंगे कि हम इसमें शामिल न हों और वे ज्यादातर पोतों को गुजरने दे रहे हैं।' हूतियों ने कहा है कि वे केवल पड़ोसी देश सऊदी अरब से जुड़े पोतों को निशाना बना रहे हैं। सऊदी अरब के युवराज के साथ हाल में हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, 'वह मेरे अच्छे मित्र हैं और मैं बस इतना कह सकता हूं कि सब कुछ बिल्कुल ठीक हो जाएगा। सब बहुत अच्छा होगा।'
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के तेजी से आगे बढ़ने के बाद यमन में विस्थापितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के नियंत्रण वाले अदन में स्थानीय लोगों ने विस्थापितों के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IAM) ने कहा कि हूतियों और सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज होने के बाद जुलाई से अब तक कम से कम 76,000 लोग अपने घर छोड़कर जा चुके हैं। कुछ दिन पहले तक यह संख्या 46,000 थी। कुछ लोगों को उस गृहयुद्ध के फिर शुरू होने का डर है जिसमें 2022 के संघर्षविराम से पहले 1,50,000 लोगों की मौत हुई थी।