Edited By Tanuja,Updated: 25 Jan, 2026 06:27 PM

इराक ने कहा है कि सीरिया से इराक लाए जा रहे इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों पर देश की अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिका की मध्यस्थता से हो रहे इस स्थानांतरण को इराक अपनी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी मान रहा है।
International Desk: इराक सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीरिया की जेलों और हिरासत शिविरों से इराक लाए जा रहे इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों पर देश की अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा। यह फैसला अमेरिका की मध्यस्थता से चल रहे कैदियों के स्थानांतरण के बीच लिया गया है। इराक की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने यह घोषणा सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व की उच्चस्तरीय बैठक के बाद की। बैठक में उन करीब 9,000 आईएस कैदियों के स्थानांतरण पर चर्चा हुई, जो 2019 में आईएस की हार के बाद से सीरिया में बंद थे।
दरअसल, पिछले महीने सीरिया में नई सरकार की सेनाओं ने कुर्द-नेतृत्व वाले बलों को पूर्वोत्तर इलाकों से हटा दिया। यही कुर्द बल, जो कभी अमेरिका के करीबी सहयोगी थे, वर्षों से आईएस कैदियों को जेलों और कैंपों में सुरक्षित रखे हुए थे।सीरियाई सेना ने अल-होल कैंप पर कब्जा कर लिया, जहां हजारों महिलाएं और बच्चे रह रहे हैं, जो आईएस आतंकियों के परिवार माने जाते हैं। इसके अलावा, शद्दादेह कस्बे की एक जेल भी सेना के नियंत्रण में आई, जहां संघर्ष के दौरान कुछ कैदी भाग निकले थे, हालांकि बाद में कई को फिर पकड़ लिया गया।
इन घटनाओं के बाद यह डर बढ़ गया कि आईएस अपने स्लीपर सेल फिर से सक्रिय कर सकता है या कैदी भागकर इराक की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इसी कारण इराक ने कैदियों को अपने देश लाकर उन पर कार्रवाई करने का फैसला किया।इराकी न्याय परिषद ने कहा कि इराक पहुंचने के बाद आतंकवाद के आरोप झेल रहे आईएस कैदियों से सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ करेंगी और फिर देश की अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा।
अमेरिकी सेना ने शुक्रवार से कैदियों को हवाई मार्ग से इराक लाने की प्रक्रिया शुरू की। रविवार को 125 कैदियों को और लाया गया। अब तक कुल 275 आईएस कैदी इराक पहुंच चुके हैं। दमिश्क और वॉशिंगटन दोनों ने इराक के इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं, इराकी संसद भी सीरिया की स्थिति और सीमा सुरक्षा पर चर्चा के लिए बैठक करने जा रही है। हालांकि आईएस को इराक में 2017 और सीरिया में 2019 में हराया जा चुका है, लेकिन उसके स्लीपर सेल अब भी दोनों देशों में घातक हमले कर रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए इराक किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहता।