अमेरिका के वैज्ञानिकों का दावा : वायरलेस रेटिनल चिप से आंखों की रोशनी में होगा सुधार

Edited By Updated: 08 Mar, 2026 01:11 PM

us scientists claim wireless retinal chip will improve eyesight

पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आंखों की रोशनी सुधारने वाली छोटी वायरलेस रेटिनल चिप विकसित की है, जो ‘मैकुलर डिजनरेशन’ (AMD) से पीड़ित मरीजों की मदद करेगी। इस चिप को खास चश्मे के कैमरे से सिग्नल मिलते हैं और यह रोशनी को इलेक्ट्रिकल सिग्नल...

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आंखों की रोशनी सुधारने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक छोटी वायरलेस रेटिनल चिप विकसित की है, जो 'मैकुलर डिजनरेशन' (AMD) से पीड़ित मरीजों की मदद कर सकती है। यह तकनीक आंखों की कम रोशनी की समस्या को काफी हद तक कम करने में कारगर साबित हुई है।

मैकुलर डिजनरेशन क्या है?

मैकुलर डिजनरेशन एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रेटिना के ‘लाइट-सेंसिंग’ सेल धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं। इन कोशिकाओं के नष्ट होने से आंखों में धुंधलापन बढ़ता है और अंततः व्यक्ति अंधा भी हो सकता है। आमतौर पर इस स्थिति में मरीज को खास तरह का चश्मा पहनना पड़ता है, जिसमें कैमरा लगा होता है।

खास चश्मे और चिप का तंत्र

इस तकनीक में मरीज एक चश्मा पहनता है, जिसमें कैमरा लगा होता है। यह कैमरा सामने की चीजों को रिकॉर्ड करता है और इन्फ्रारेड लाइट के जरिए चिप तक भेजता है। रेटिनल चिप उस लाइट को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलती है, जिसे दिमाग समझता है। इस प्रक्रिया से मरीज को सामने की चीजें साफ दिखाई देने लगती हैं।

चिप का डिजाइन और सर्जरी प्रक्रिया

इस चिप को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने डिजाइन किया है। यह मात्र 2×2 मिलीमीटर का इम्प्लांट है, जिसे सर्जरी के जरिए रेटिना के नीचे फिट किया जाता है। यह खराब सेल्स की जगह लेता है जो रोशनी को पहचानने में असमर्थ थे। अब यह चिप रोशनी को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर सीधे दिमाग तक भेजती है।

मरीजों में मिले शानदार नतीजे

यूरोप के 17 मेडिकल सेंटर में हुए परीक्षण में 60 साल से अधिक उम्र के 32 मरीजों को शामिल किया गया। इन परीक्षणों में 26 मरीजों की नजर में सुधार देखा गया, यानी लगभग 84% मरीज अब घर पर इस डिवाइस की मदद से नंबर और शब्द पढ़ पा रहे हैं। औसतन मरीज आई चार्ट की पांच लाइनें पढ़ने में सक्षम हुए, जो काफी काबिलेगौर है।

उम्मीद की नई किरण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब आंखों की रोशनी सुधारने में इतनी बड़ी सफलता मिली है। हालांकि यह तकनीक आंखों की पूरी 20/20 विजन वापस नहीं लाती, लेकिन यह मरीजों को उस स्थिति से बाहर निकालती है, जहां उन्हें पूरी तरह दिव्यांग माना जाता है। अब इस डिवाइस को अमेरिका और यूरोप में आम जनता के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

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